शिक्षक दिवस कि सार्थक्ता

गुरु रे ब्रम्हा गरु रे विषनू  गुरु रे देवो महेषवर​:

गुरु रे सांछात पब्रम्हा तस्मेः श्रि गुरुबे नम​:

अर्थ्::

गुरु हि ब्रह्मा है, गुरु हि विश्नु है, गुरु हि देव महेश है ,

गुरु हि सक्छात परमेश्वेर है, एसे गुरु को मेरा सत सत नमन ॥

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शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ अपना पोस्त्\गद्य कि शृरुवात करना पसन्द करुंगा,

हमारे भारत मे  गुरू होते थे और शिष्य ! दोनो मे अघाद्य प्रेम कि परम्परा रहि है, अपना यह देश परम्परओं का देश है और परम्परा एक धारा होती है , नदि कि अविरल धारा, जो निरन्तर अविकल बहती है नदि कि अविरल धारा समय के सथ-साथ अब बदल गयी है,

अब ये परम्परा  गुरु-परम्परा   खत्म होति प्रतित हो रहि है, गुरू और शिष्य ! दोनो मे अघाद्य प्रेम कि परम्परा और निस्वार्थ शिछा देने कि भावना खत्म होति प्रतित हो रहि है, अब  गुरु तो रहे नही शिछक मिल्ते है , जिन्से  निस्वार्थ शिछा कि अपेक्छा नहि, आज विध्यलया नहि स्कृल मिल्ते है वो भि प्राइभेत स्कुल, वहा शिष्य नहि मिल्ते , मिल्ते है विध्यार्थि ,            . विध्या ( ग्यान्\एदुकेशन्) +  अर्थ (मनि\पैसा)= पैसा है तो शिछा

नहि है, तो निचे वर्नित फोटो के तरह अध-कचरा ग्यान ले या कचरा उथाये, दुखद्: , दुसरे तरफ़ बैग उथाये बच्चे जो प्राइभेत स्कुल को जाते है,

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ये प्राइभेत स्कुल के नखरे भि कम नहि है, काफ़ि महङे और काफ़ि भिड़-भाड़, गुरु-शिष्य परम्परा खत्म ,शिष्य अर्थ्-परम्परा शृरु ,

गुरु—- ह्म्!!!!!!!!!!!

गुकारश्चान्धकारस्तु रुकारस्तान्निरोधकृत ।

अन्धकारविनाशित्वाद गुरुरित्यभिधीयते ॥

गु-जो अन्धकार , रु- हाटाना\साफ़ करना, जो अन्धकार को हटा कर ग्यान का प्रकाश फ़ैलाये वो गुरु होते है।

इस अर्थ युग मे एसे गुरु क होन| थोड़ा मुशकील लग्ति है।

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आज के आज़ाद भारत मे गुरु-शिष्य परम्परा को जारि रखी जा रहि है ड़ाक्टर सर्वपल्लि राधाकृष्णन के जन्म्-दिन के शुभ अवसर पर ५ सितम्बर को । ५ सितम्बर  १९८८ को इन्का जन्म  चेन्नइ मे हुआ था, वो भारत के द्वतिय रश्त्रापति बने,

पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों  के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं.

–  सर्वपल्ली राधाकृष्णन

शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके.

–   सर्वपल्ली राधाकृष्णन

एसे महान पुरुष के जन्म दिवस पे उन्को सत सत नमन्

पर दोस्तो ,गरिबो को शिक्षा  का अधिकार मिले. सरकारि स्कुल उचित धंग से चले
वहा गरिब बचचो को उन्न्त भविस्या बनाने का मौका मिले, शिक्षक शिक्षा दे अर्थ से मुक्त शिक्षा दे,
सुधार कि आवस्य्क्ता है, जिस्से हामारा भारत शिक्षित भारत बने ,जब तक शिक्षा को हम अर्थ से मुक्त नहि कर दे, जब तक हमारे सारे बच्चे को शिक्षा  का अधिकार ना मिले तब तक शिक्षक दिवस कि सार्थक्ता पे मै सवाल उथाते रहुंगा,

अपका
विशाल श्रेस्ठ
फोटो हम्ने अपने दोस्तो के फ़.बि. वाल से लिया है! और पोस्त हमारे मन कि अभिव्यक्ति मात्र है
धन्यवाद्

10 thoughts on “शिक्षक दिवस कि सार्थक्ता

  1. sach kaha ab ye pvt school wale to loot ke dukan khool rakhe hai
    bus fis ke nam par lootna hi inko aata hai,
    sarkar ko ise band karana hi hoga, government school may sikcha ke star ko sudharna hoga

    • pvt schools r like a business organization they need only money(profit) any how!
      there is no humanity or education social service , in delhi lakhs of people are fighting against this pvt school loot
      government is still maun mohan
      every where its same in upa ruling state or nda ruling state

  2. pvt school ko nakhra yatti dhrey chan ki ke bhanne yar
    school is the best way of income now,school is not the place for education, so sad na
    maly tha dheray sorry feel hun chan nani haru ko bhawisya andhkar ma ni na pugosh

  3. ThanksVvishal for sharing this post…. I also believe that Private schools are a business institutions today…….. They are playing with the future of India.

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