कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी गलत है और सरकार निक्क्मी! मगर हम क्या है?

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी गलत है और सरकार निक्क्मी! मगर हम क्या है?

असीम त्रिवेदी के खीलाफ़ मुम्बै मे यचिका दायर करने के एक माह पस्चात कार्यावाही सुरु कि और गिरफ़्तारी हुए ११ माह के बाद्, इतने दिन कहा सोयि पड़ी थी सरकार्?

भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के बीच जब अन्ना हजारे का आंदोलन मुंबई के एमएमआरडीए ग्राउंड में चल रहा था तो युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने एक कार्टून बनाया था जिसमें राष्ट्रीय प्रतीक तीन सिंह के सर की बजाय भेडिये का सर बनाया था और सत्यमेव जयते की जगह भ्रष्टमेव जयते वाला कार्टून बनाया था. निचे देखे क्या ये हमारे राष्ट्र का अपमान नही?

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प|चवी क्लास के बच्चो को भि पता है कि राष्ट्रीय ध्वाजा,राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह का अपमान समुचे राष्ट्र का अपमान है, मगर केजरीवाल जी  केहते है-असीम को अपने भावनाओ पे काबु रखना था, अगर गलती हो गयी तो इसकि देश्-भक्ति समझ के इसे माफ़ि मिलना चहिये,                                                                                                       केजरीवाल जि असीम कोइ दुध पिता बच्चा तो है नहि? ये सोच-सम्झ कर कि गयि गल्ती है, अब कोर्ट तय करे कि असीम को क्या सज़ा मिले,

कुछ महान लोग असीम को वीर देश्-भकत दिखा रहे है,ये गल्त है,आप कि अभिवय्क्ति कि स्वातन्त्रता को कोइ नहि रोक सकता पर राष्ट्र से उपर कुछ नहि हो सकता।

आप देखे हमारे राष्ट्र के गौरव चिन्हा को मगर सम्मान के साथ …

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राजनेताओ से तो कोइ उम्मीन्द रखना बेव्कुफ़ी है क्युकी राजनेता तो स्वाभिमान और लज्जा दोनों खो चुके हैं। अब आप खुद देखे निचे कपील सिब्बल जि का कमाल्..

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हमारा कुछ दायित्वा है कुछ करतव्या है, हम भारत के नागरीक इसे कब सम्झेगे?

सिर्फ़ झन्ङा लेकर भारत माता कि जै बोल देने से कोइ देश्-भकत नहि हो जाता, कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी गलत है और सरकार निक्क्मी! मगर हम क्या है?

10 thoughts on “कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी गलत है और सरकार निक्क्मी! मगर हम क्या है?

  1. कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के लिए रंगकर्मी, कलाकार, और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज भी खुलकर बचाव कर रहे हैं, क्या सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी प्राप्त ‘पेरियार की असली रामायण’ भी आम लोगों तक पहुँच पायेगी?
    कितना बवाल खड़ा होगा अगर कट्टर हिन्दूओं को पता चलेगा कि पेरियार की रामायण मैं दिल्ली पुस्तक मेले से खरीद कर लाया हूँ ।
    १६-९-१९७६ के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पेरियार की रामायण के केस में एपीलांट
    यू.पी. सरकार की हार हुयी थी, जस्टिस पी. एन. भगवती, जस्टिस वी. आर. कृष्णा अय्यर और जस्टिस मुर्तजा फाजिल अली के फुल बैंच में पेरियार रामायण को सही ठहराया गया था फिर भी ये ग्रन्थ सर्व-सुलभ नहीं है । कोर्ट का फैसला मेरे पास है, जो पढ़ने का इक्षुक हो उसे मेल कर सकता हूँ ।

    • jarur prabhuji. ab justice katju ne kya kaha suniye- aseem ko apne bhawnaoo pe kabu rakhna tha, jo hua galat hua aur sarkar jo kar rahi hai wo aur jayada galat hai, yaha sare ke sare bewkuf nazar aa rahe hai,
      anna ne kaha- aseem bachpane may galti kar gaya, sarkar ko use maf krna tha, desdroh ka aroop galat hai,
      kejriwal ne kaha –असीम को अपने भावनाओ पे काबु रखना था, अगर गलती हो गयी तो इसकि देश्-भक्ति समझ के इसे माफ़ि मिलना चहिये
      cartoonist irafan khan ne kaha- aseem ko deshdroh ke aroop may giraftaar krna galat magar aseem ko bhi rastriya chinha ka samman krna chahiye.
      aur maine bhi lagbhag yehi bat uthayi hai prabhu ji

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