आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अङ्रेजो के बनाये कानुन

आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कोइ सरकार रोक नही सकति, ये आपका हक़ है, मगर आपकी अपनी भी जिम्मेदारि है,

आपकी सहुलीयत के लिये पेहले कुछ कार्टृन  पोस्ट कर दु,जहा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दर्शा कर सरकार और नेताओ का वीरोध किया गया है……..

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यहा बता रहे है कि किस तरह यु पी ए के कर्याकाल मे कितने घोटाले हुए

 

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  यहा बता रहे है कि किस तरह यु पी ए से बी जे पी भि नाराज़ है, 

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अन्नाजी ने कैसे कित्ने ही नेताओ को बेन्काब किया

 

अब अपको असीम की कार्टृन  पोस्ट कर दु, जिसे मै अनुचित मानता हु,

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आज बहुत सारे युवक युवतिया असीम के साथ खरे दिख रहे है, और उन्के उस घ्रिणीत कार्टृन के समरथन मे खरे है। इन्का मानना है कि असीम ने कुछ भि गलत नहि किया, उन लोगो कि भावनाओ का सम्मान करते हुए मै आपको कुछ जन्-अन्दोलन से जुड़े नेताओ का बयान सुना दु……

१-असीम ने जो किय वो गलत किया ,उन्हे अपनी भावना पे काबु रखना था, सरकार  देश्द्रोह का अरोप न लगाये……-केज्रिवाल जि,

२- कार्टृन  बनाना गलत नहि, मगर देश के प्रतिक क खयाल रखना था​, सरकार पागल है जो देस्द्रोह का  केस चले- बाल ठाकरे

३- नहि नहि ये उचीत नहि है, देश का सम्मान करे…..जुस्तिस हेगरे

४- असीम बच्चे  है, गल्ति हो गयि, सरकार जल्दबाजी मे गलत किया, वपुस लो देशद्रोह का अरोप …… श्री अन्ना हज़ारे

५- असीम का समर्थन नहि,पर सरकार जवाब दे? देश्द्रोह कैसे लगाया​…सुस्मा स्वराज्य​

६- राष्ट्रीय प्रतिक चिह्नों  का सम्मान होना चाहिये, असीम के उपर अरोप लगना सरकर कि गल्ति,,,,मेघा पाटेकर्,

यहाँ ये बात स्पष्त कर दुँ की असीम कि भावनाओ का हम पुरा सम्मान करते है मगर जैसा उपर सभी समाजसेवि और नेता​ओ ने असीम के कदम कि अलोच्ना और सरकार को देश्-द्रोह का अरोप लगाने पे धीक्कारा है, हम ने भी कहा की असीम ने गलत किया और सरकार ने और भि जयादा गलत काम किया|

अपको ये भी बता दु कि सिर्फ़ जस्तिस मार्कन्दये कातजु ने कहा- असीम अगर देश का सम्मान नही करना चाह्ता तो आप उसे मजबुर नही कर सक्ते।

हम यहा किसी का विरोध करना चाह्ते। मगर क्रिप्या देश प्रेम और देश की इज्ज्त सब्से उपर होना चाहीये।

अन्ना जी ने क्या खुब कहा की सरकार ने जल्दबाजी मे गलत कदम उठाया है,सचमुच सरकार ने अपनी हार मानी और असीम को दो दिन बाद रिहा करवया। मै ये भी मानता की अङ्रेजो के बनाये कानुन पे अब सुधार की जरुरत है, आखीर कब तक हम १८वी सदी के कानुन को मानते रहेनगे, अब हमे इस कानुन को बद्ल्ने की जरुरत है । काफ़ी बद्लाव कानुन  हुए है और अभि और होने चहिये। मगर तब तक हमे इस तरह के गलत कारटृन से बच्ना होगा।

उरिसा , अन्ध्रा , गुजरात और कर्नात्का मे पिछ्ले १५ सालो मय १२ पत्राकार को देशद्रोह का अरोप लगा कर जेल मे डाला, अभि तमिल्नदु मे ८०००  लोगो पे देशद्रोह का अरोप लगा , क्युकि वो कोरम्कुलम के ग्रामिन परमाणृ सनयन्त्रा क विरोध कर रहे है, अपको याद हो कि वीनायक सेन पे भि पे देशद्रोह का अरोप लगा था, ये गलत प्रतित होति है मुझे (मेरा अपना मत ) कानुन मे बद्लाव की जरुरत है,मगर ये कानुन के जानकार ही इस्मे सुझाव दे सकते है, मुझे कानुन का कोइ ग्यान नहि है,

हा! मुद्दे पे आउ, असीम ने गल्त किया था और सरकार ने और भि बरी गलति कि और अब हमे बद्लाव कि जरुरत है, मगर देश का सम्मान सब्से पेहले………………!

जय हिन्द्!!!!!!

 

नोट – विचार मेरे अपने है और आप कि सहमती और अ-सहमती जायज़ है, फोटो विभीन्न फ़ बी पोस्ट से ली गयी है

4 thoughts on “आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अङ्रेजो के बनाये कानुन

    • ji ha,
      hamne pehle bhi kaha tha aseem ko police ne hero bana diya hai, aseem pe sansad aur rastra ka apman ka case chalna chahiye tha, aseem ne galat kiya aur sarkar ne aur bhi jayada galat kam kiya

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