दुख्-सुख (कर्म्) और बाबा बगांली

मित्रो जो बात आज मै केह्ने जा रहा हु ,उससे बहुत सारे लोग नारज़ हो सकते है….

एक मित्र ने मुझे मेसज किया- मै अभी बहुत मुसीबत मै हु, मगर सा* बाबा के अशीर्वाद से जीवीत हु, सा* बाबा के अशीर्वाद  से सब ठिक्  हो जायेगा….क्रमश्…

मैने पता किया तो पता लगा वो एक बंगाली बाबा के यहा आना जाना शुरु किया है, ४ महीने से वो कोइ जाँब मे नही। दुखद: घटना है।

Image

मीत्रो आप अगर मुसीबत मै है तो कोइ भी बाबा या कोइ भी भग्वान अपकि मदत नही करेंगे! वो आप हो जो अपकी सहायता कर सकते हो। आप अगर अपनी मदत आप नही करेंगे तो आपकी मदत करने कोइ अवतार  नही आयेंगे या कोइ चम्तकार नही होगा।

“कर्मन्ये वीधिकरस्ते मा फ़लेशु कदाचना”  ये भगवद गीता मे लीखा है, ये तो सभी जानते है, अनुवाद है-कर्म करते रहे और फ़ल कि इक्छा ना करे, भावार्थ: है- कर्म करने पे अपका अधिकार है,अपका कर्तव्या है, आप कर्म करे, क्युकी कर्म करोगे तो हि कर्मानुसार फ़ल भी मिलेगा, मगर उस फ़ल कि इक्छा ना करे, वो मेरा (भग्वान्) अधिकार छेत्र मे है और मै समयानुसार ही फ़ल दुंगा!!

किस जगह भग्वद गीता , रामायण या महाभारत मे लीखा है की आप फ़ला फ़ला पुजा -पाठ करो, आपको फ़ल या सफ़लता मिल जायेगी, हमने तो नही पधा अभी तक !

अरे मुर्खो!! जब भग्वान श्री क्रिष्ना को और भग्वान श्री राम को जन्म लेकर , लड़ायी लड़ कर (कर्म करके) कन्स और रावण  का वध करना पड़ा! तब जाके सारे विश्व मे उनको सम्मान मिला फ़ल मिला।(बहुत सारे मित्रा सहमत नहि होंगे, उन्से छमा मङ्ता हुँ)। तो आप क्यु पिछे हठ रहे हो, आगे बधो, दुखो से लडो और सफ़ल्ता को छिन लो। जब भग्वान ने कोइ शोर्ट-कट नही अपनाया तो आप क्यु?

Image

ॐ नमो: भग्वते वाशुदेवाय :

ॐ नम: शिवाय्: ……. भग्वान वाशुदेव या भोले बाबा हमारा कल्याण करे। सत्य है, वो करेगे। भग्वान आपके साथ है, मगर आप भि तो कदम बधाओ, आप भि तो कर्म करो, आपके सामने अगर प्रसाद भी रखा है तो आप उसे स्व्यम: खाओगे, आप खुद हाथ बधाओगे। अपके हर छोटे बड़े काम के लिये कोइ नही आयेगा, स्वयम अपना काम करे, अगर दुख्: है अगर कष्ट है तो आप लड़ो उस्से, “भग्वान या किस्मत भि बहादुरो का साथ देता है”। ये तो आपने सुना और माना होगा।

ये सही है कि ज़िन्दगी मे उतार चधाव आता है, और कुछ लोगो को लग्ता है कि ये सब केवल उसी के साथ होता है, मुझे भी व्यक्तीगत रुप से पेहले येही लग्ता है, और मैने लड़्ना सुरु कीया और अब तक लड़ता रहा हु। क्यृकी-  “लेहरो से डरकर नौका पार नही होती कोशीश करने वालो की कभी हार नही होती।”

आप सभी जो किसी बाबा के चक्कर मे हो या दान्-दछीना दे कर अपनि मुश्किले दुर करना चहते है तो खबरदार रुक जाये , अपका ये कदम ना तो धर्म सङत​: है न कर्म्-सङ्त्!

और अन्त मे …….. भग्वान ने अब बेव्कुफ़ो कि मदत करना बन्द कर दिया है, उन्होने कहा है-

“नाहं प्रकाश: सर्वस्य योगमाया समावृत:!

मुढ़ोऽयं  नाभिजानाति लोको मामजम्व्यय्म्:!! भग्वद गीता:७.२५

मै कभि मुर्खो तथा बुद्धिहीन के सामने प्रकट नही होता, मै अपनी माया से प्रच्छन्न रह्ता हु………….!

इसिलिये मुर्ख ना बने और कर्म करे और हर मुसीबतो का मजबुती से सामना करे, दुख: तो आनि-जानि है, और जरा एक फ़िल्मी गाना गा कर पध खत्म करु- जिन्दगी कि येहि रित है हार के बाद हि जीत है………….!

नोट- ये मेरी अपनी विचार है, मैने किसि कि भि धार्मिक भावना को ठेस ना पहुचे इस्का खयाल रखने का प्रयत्ना किया है! धन्यावाद्

विशाल श्रेष्ठ्

6 thoughts on “दुख्-सुख (कर्म्) और बाबा बगांली

    • ha ye ek bhayanak sachhayi hai
      kaese padhe likhe log bhi murkh ban jate hai
      500 ya hazar dohazar kharch karke wo apne kathinayi se par pana chahte hai, murkhta hai , koi baba ya tantrik kisi ka bhala nahi kar sakta, wo sirf apna bhala kar sakta hai

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s