“काजल कि कोठरी मे काजल तो लागे हि लागे!”

पेहले आप सभी अन्ना जि को सुने
आंदोलन के दो हिस्से हुए हैं लेकिन मंजिल एक है. इसे किसी पार्टी या संगठन का विभाजन नहीं कहना चाहिए. दोनों मोर्चे से लड़ाई होगी. देश से भ्रष्टाचार खत्म करना हम सबका लक्ष्य है. मैंने अपने साथियों को पार्टी बनाने से नहीं रोका है. अगर वे अच्छे प्रत्याशी ढ़ूंढ निकालेंगे तो मैं उनका प्रचार भी करुंगा. उनके सभी अच्छे प्रत्याशियों के लिए मैं प्रचार करुंगा,” – अन्ना हजारे (पुणे में)Final War Against Corruption.
अब आप सभी India against corruption के सुने–आप सभी बिजलि बिल पेमेन्ट न करे क्युकि सरकार ने बिजलि बिल बधा दी… India against corruption (kejriwalji ki) 
कल कहेंगे India against corruption – आप लोग किरायाना समान खरिदो और उसका बिल मत दो क्युकि सरकार ने एफ़ दि आइ लाया।
अग्ले महिने- आप लोग वोट ना डाले क्युकि अन्तिम दो-तिन चुनावो मे अरविन्द केजरिवाल ,सिसोदिया जि और कुमार विस्वास जी ने अपना महत्वापुर्ना मत्-द!न नाहि किया था.
शायद ये एक केवल ख्याल हो! भग्वान करे ऐसा ना हो, मगर जैसी आए ए सि कि अन्दाजे-बया है वो कुछ भि केह सकति है।
क्या इसि कारण अन्ना जी ने केजरिवाल जी का साथ छोड़ा?
क्या अन्ना जी और राले-गण के लोग इतने दुखि थे कि अन्ना ने अपना भ्रस्ताचार विरोधि आन्दोलन  का पता बदल कर राले-गण कर दिया?
क्या आज अन्ना जि केजरिवाल जी से नारज है?
इन सवालो क जवाब मेरे पास नहि है। मगर मै कल भि अन्ना जी के साथ था और आज भि अन्नाजी के साथ हु, कल अगर किसी लड़ायी मे अन्नाजी ने महरास्ट्रा बुलाये तो वहा भि जाउंगा

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एक बात धयान रहे गाव-देहात मे एक कहावत है-“दो-तिन नाव की सवारि मेहंगी पर जाति है।”
अगर केवल भ्रस्टाचार के खिलाफ़ आन्दोलन चल्ता तो आज सरकार  रो रही होति और टिम अन्ना कभि भङ ना होति।
मेघा पाटेकर और श्री अन्ना हज़ारे के रेह्ते भि अगर ये नहि सिख पाये तो आप राजनिति के लिये सर्वथा उप्युक्त बन्दे हो केजरिवाल जि. आप का भविष्य राजनिति मे उजवल है|

आप राजनिति मे आओ, अच्छा है जि, काग्रेस को हराओ, अच्छि बात है जी।
मगर राजनिति मे आकर बिना किसि बड़े दल के सहयोग के आप सत्ता-रुध दल को हरायेंगे कैसे?
जन्तर-मन्तर से या फ़ेस्-बुक से सरकार नहि बद्लति, सरकार बदल्ति है वोट दालने से! तो अर्विन्द जी चलो मेरे साथ पेहले वोट डालने……!
वोट कि चोट को पेह्चाने, लोकतन्त्रा मे वोट सब्से बड़ि सक्ति है। ईन्दिरा गान्धि भि चुनाव हार जाति है तो मन मोहन जी  क्या है?                                                                                                                                                       

राजनिति मे अन्नाजी जैसे सिधे लोग सफ़ल नहि हो सकते, आप हो सकते है, मगर एक भिजन तो हो?
केजरिवाल जि एक राह पे आगे बधे भटके नही।राह मे रोड़े आयेंगे काटे बिछेंगे मगर एक पथ पे बधते रहे और हा जरा     बचके-बचाके क्युकि ये याद रखे कि राजनिति काजल कि कोठरी है,और  “काजल कि कोठरी मे काजल तो लागे हि लागे!”

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