गान्धि जय्न्ति और केजरिवाल कि राजनितिक दल

२ अक्टूबर गान्धि जय्न्ति , सारा देश मोहन दास करमचन्द गान्धि को याद करेंगे।हमारे रास्त्रापिता और हमारे प्यारे बापु जी। महान आइन्सतिन ने कहा था-आने वालि पिधि इस बात पे विसवाश नहि करेंगे कि– गान्धि जी ज​एसे भि कोइ हाड़्-मान्स का कोइ इन्सान इस दुनिया मे था। इतने महान थे बापु, किन्तु मै यहा आज केवल बापु को याद नहि करेंगे बल्कि कुछ मुद्दो पे प्राकाश दालेंगे…….!

सोशल नेटवर्किग साइट पे जो भाइे बन्धु कमेन्ट करते है उन्मे से आधे भि वोट डालने नहि जाते, और हमे याद है पिछ्ले लोकसभा चुनाव और विधान सभा चुनाव मे लोकतन्त्रा के सब्से बड़े पुजारि, श्रि केजरिवाल जि औए मनिस सिसौदिया जि वोट डाल्ने नहि गये थे, तो उन्के उन चेलो से क्या उमिन्द कर सकते है,साथ हि दिल्लि और एन सि आर मे श्रि केजरिवाल के सभा मे जो भिड़ मौजुद होते है वो भि ५० % से जयादा बन्धु वोट नहि डाल्ते, क्यु? क्युकि वो सारे नव्-युवक और किशोर(जिन्कि आयु १८ से कम्) जयादातर बाहर से पधने य काम करने आये होते है,कुछ वो भि सामिल होते है जो केवल घुमने या टीबी मिडिया के चकाचौन्ध से आते है।बचते है केवल ४०% उनमे से भि आधे लोग सरकार से नाराज वोटर होते है जो बिजेपि या किसि और दल को वोट देना सहि सम्झ्ते है।एसे मे तो केजरिवाल जि तो काग्रेस को हि मद्त पहुचाने जा रहे है अगामि विधानसभा चुनाव मे।क्युकि वो जो कुछ १० % वोट लेङे वो काग्रेस विरोधि वोट को हि बाटेङे।

और कुछ मित्र हमारे ज​एसे अन्ना सम॔थको को राजनितिक दल क सम॔थक केह्ते है उन्कि मनोद्शा पे तरश आता है, प्रभु उन्को सद्-बुद्धि दे! आमिन्!!!Image

२ ओक्टुबर गान्धि जयन्ति, हमारे ज​एसे लोगो के लिये ये एक अत्यन्त म्ह्त्वापुर्ण दिन है, कुछ महानुभाव दो-चार किताबे पध कर रास्त्रा पिता के खिलाफ़ अपश्ब्द का इस्तमाल करके अपने आप को विद्वान समझ्ते है, उन्कि सद्-बुद्धि के लिये भि प्रभु से प्राथ॔ना करते है।

श्री केजरिवाल ने २ ओक्तुबर का दिन चुना है राज्नेतिक दल कि घोषना करने के लिये, जिस इन्सान ने इसि दिन कांगरेस को भङ करने कि बात कि थि, जिन्होने कहा कि हमारि रस्त्रिया कांग्रेस ने देश को अज़ादि का बिड़ा उथाया था, और अब इसको भङ करे और हमारे दल को राज्नेतिक दल ना बनाये,(ये अलग बात है कि किसि ने गान्धि जि को नहि सुना)।उस दिन गान्धि जि का नाम लेकर केजरिवाल जि एक सामाजिक दल को राजनितिक दल मे बदल देगि, और फ़िर जोर से कहेङे- हम अन्नाजि और गन्धि जि के अनुयायि है! हद है भाइ हद है!!

मुझे किसि राजनेतिक दल से मोह नहि, केजरिवाल जि का भि स्व|गत है मगर ये कैसे अन्ना और गन्धि भगत है? जिन्हे ना तो अन्ना से प्रेम है न गन्धि से, उन्को तो मोह है, मोह सत्ता का पावर का।
मेरे घर मे गान्धि जि का एक बेजोड़ पेन्टिग है  जिसे मैने कचरे के पेटि से उठा कर लाया था, एक टाइ॔ और शर्ट पैन्ट पेह्ने युवक को इस तरह कचरे के धेड़ से कुछ उथाते हुए देख युवक युवतिया घ्रिणा कि नजरो से देख रहे थे,फ़िल्मो मे कोइ एसा करता तो तालिया बजति किन्तु असलि ज़िन्दगि मे लोग पागल सम्झते है।मै भि घबरा गया था, फ़िर सोचा गन्धिजि के लिये इतना तो कर हि सकता हुँ! 

नेता और समाजसेवक गान्धि जी को माल्यार्पण करेङे , फोटो खिचवाएङे और घर जाकर भुल जायेङे। आज गान्धिजी को केवल नोट पे इज्जत मिलता है क्युकि आज नोट कि हि महिमा चलति है, सच है भैया माल है तो ताल है।
मै वैष्नो देवि के दर्शन हेतु जा रहा हु इसलिये दो दिन पेह्ले ये पोस्ट प्रकासित कर रह हु। सभि से आग्रह है कि गान्धिजी के मुर्तियो को न साफ़ करे न माला पेह्नाये, बस दो-चार गान्धि-सिद्धान्त का अनुसरण कर ले गन्धिजी को काफ़ि खुशि होगि।
धन्यावाद्!

नोट्-post karne me late ho gaya ye post main 2 din pehle post karne wala tha

प्रकासित फोतो गुग्ल सर्च कि देन है, विचारमेरे अपने है. कृप्या अन्यथा ना ले

4 thoughts on “गान्धि जय्न्ति और केजरिवाल कि राजनितिक दल

  1. अरविँद केजरिवाल जो कर रहा है अचा कर रहा है

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