आधुनिक प्यार!! :-(

ज़िन्दगि युहि बितति जा राहि है।

मिलति नहि है एक ठहराव, जिसकी जितनि जरुरत है।

वो मुझसे  उतनि हि दुर भाग्ति जा रहि है।

जिनता नजदिक जाना चाहता था उसके॥

 

हाथ उन्होने हि पकरा था बड़े प्यार से।

मै भि बहता चला गया, चाहत जो उन्कि थी।

कुछ हुआ,क्या हुआ , पता नही।

आज सिर्फ़ उन्कि छुवन याद है, और साथ कोइ नहि॥

 

उन्कि मदभरि मुस्कान,वो दिल्कश अन्दजे-बया।

वो उन्का जुल्फ़े सवारना,सवार के गिराना जुल्फ़े।

नजरे मिलाना, मिलाके चुराना , कत्ल कर गयि मेरा

हाय !! और कोइ पुलिसवाला  मेरि रिपोर्ट भि नहि लिखता॥

Image

कुछ अलग हि चाहत थि उन्कि सायद्।

खड़ा ना उतड़ पाया मै उन्के चाहत मे।

चलि गयि छोर के मुझे, कहि और, कहि और्॥

 

सुख चाहिये था उन्हे, मै सम्झ नहि पाया।

तो चल दि वो सुख कि तलाश मे, अधुनिक पयार कि तलाश मे।

मुझे छोर के यहाँ, दुख और तनहायी के साथ ॥

 

सिसक रहि है मेरि ज़िन्दगि यहाँ।

दर्द कम और हैरानि ज्यादा है।

क्यु दिल्-ए-विशाल को

अधुनिक प्यार करना नहि आया, नहि आया अधुनिक प्यार करना॥

Image

© vishal shresth

note-written in college time (2000 @) image credit to goggle and my click

4 thoughts on “आधुनिक प्यार!! :-(

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s