हाँ ! मैं बिहारी हूँ ! yes ! i am Bihari!

सुबह 7 .30 मिनट हुए थे दिनांक 14 नवम्बर  और  हमेशा की तरह हाथ जोरे मैं भगवान से प्राथना कर रहा था , पूजा खत्म करने के बाद हमेशा मैं  लोगो के लिए प्राथना /दुवा करता हु।

आज सुबह से  ही श्री बाला साहब ठाकरे की स्वस्थ की खबरे न्यूज़ में थी , मैंने भी उनके लिये  दुवा मांगना चाहा , हाथ जोरे आंखे बंद की और प्राथना करने लगा की तभी मन कहि और चल परा,यकायक बीते दिनों का स्मरण आ गया,और आखे डबडबा गयी,आंशु झर परे, याद आ गयी अगस्त 2003 की मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में चाय पीते 5 लरके (विध्यार्थी ) जो की परीक्छा देने आये थे (शायद रेलवे की थी)सुबह का समय था .पिंटू जो की मेरे शहर दरभंगा से था और उन सबका अगुवा था ने किसी लोकल लरके से एक एड्रेस (पता ) पूछा , लरके ने जवाब देने के बजाय  उससे पूछा यहाँ क्यू आये ?
पिंटू ने जवाब दिया -भैया परिकछा  देने! उस लोकल लरके ने उनसब्को  डाटा  कहा-भैया होगा तेरा बाप और सालो यहाँ क्या खैराते बटती है,भागो बिहार! बिहारी कही के, और फिर वो चला गया। ये  बचचे जिनकी उम्र 17 से 19 साल रही होगी , वो सब डर गये, उन्हें लगा की वो अपने प्यारे मादरे -वतन हिंदुस्तान  में नही कही दूर दुश्मन देश में है।
खैर जैसे-तैसे हिम्मत करके वो आगे बढे, मंजिल उन्हें पता थी मगर अब वो  घबराये से सहमे -सहमे से किशोर थे ,जो उस घरी को कोश रहे थे जब उन्होंने मायानगरी आने की ठानी।
अभी वो बेचारे सरक पे पैर रखा ही होगा की शिवसेना के राकछस हॉकी स्टिक और लाठी झंडे लेकर बीसियों गुंडे आन परे,उनलोगों ने जिस भी लरके को देखा मरना-पीटना शुरु कर दिया,उन गुंडों में एक वो भी था जिसने पहले ही पिंटू को गलिया दी थी,बाकि बचचों का तो पता नही पर पिंटू आज भी लंगरा के चलता है,और वो मुंबई को हिंदुस्तान का हिस्सा मानने से डरता है।
उस गरीब के माँ-बाप उसका उचित इलाज भी नहीं करा सके , माँ की ममता को कितना गेहरा अघात पंहुचा ये एक माँ ही जान  सकती है ।

अभी मैं इस दुखद घटना की याद से बहार निकला ही था की एक और याद ने मुझको फिर रुला दिया,दिनु एक रिक्शा वाला का बेटा था, वो बेचारा अपनी बीवी और एक बच्चे के साथ मुंबई चल परा, करीब एक साल मुंबई में होटलों में काम करने के बाद उसने एक रेहरी निकली , सब्जी की रेहरी ,उसकी अपनी बिज़नस ,वो बहुत खुश रहने लगा, अपने माँ-बाप को अब पैसे भी भेजने लगा, इस बिच उसके एक और बेटे हुए,भगवान को धन्यवाद् देते हुए उसकी जिंदगी काफी हसी-ख़ुशी बीत रही थी की तभी जुलाई 2010 मनसे के लोगो ने उत्तर-भारतीयों के खिलाफ हिंसक बयान-बाजी शुरू कर दी ,और फिर दादर के पास इक शाम मेरे दिनु (जिसने मुझे गोद में खिलाया था) की लाश मिली ,उस दिन पुरे मुंबई और उसके आसपास करीब सैकरो  लोगो की बेदर्दी से पिटाई हुए,पुलिस ने एक भी हिंसक घटना को नहीं माना हाय! रे कांग्रेस सरकार ! और बेशर्म हैवान शिव-सैनिक और मनसे के गुंडे,

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आह! क्यु नहीं लगेगी उन माँ की जिसने अपना बेटा खोया? क्यू तुझे भगवान माफ़ करे? क्यू तेरे घर में भी मातम का आलम न हो? क्या हम हिन्दुस्तानी नहीं है? क्या ये हमारा देश नहीं है?
रोते हुए मैंने बस इतना बोला  -हे ! भगवन मैं निशब्द हु, दुवा भी नहीं मांग सकता, तुझे जो करना है कर, और ठाकरे साहब आपके लिए मेरे पास कोई दुवा/विनती नहीं है- क्युकी हाँ ! मैं बिहारी हूँ ! और मुझे गर्व है इस बात का ।
जय हिन्द जय बिहार
नोट-नाम काल्पनिक है जिससे कोई विवाद न हो, पर पात्र  और घट्ना काल्पनिक नहीं, समय में कुछ अंतर हो सकता

 किसी की भावना अहित करने की कोई मंशा नहीं,किसी को चोट पहुची हो तो अज्ञानी समझ माफ़ करे,
 विशाल श्रेष्ठ

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