माँ मुझको भी जिना था

  •  माँ प्यार से  दो रोटी खा ले
    कोख में तेरे मैं  भी हु !
    तू भी भूखी ना रहे .
    मैं भी भूखी न सोऊ !!
माँ! बाबा भी आते होंगे Image
गुर या चीनी लाते होंगे !
चाय बना के तू पि लेना
ठण्ड बरी है,आराम मीलेगी ,!!
घुटनों में जो दर्द है तेरे
थोरा तेल भी तू मल लेना !
रसोई में तो अब बची नहीं
बगल वाली चाची से ले आना !!
माँ तू इतनी गरीब क्यों है?
साड़ी तेरी फटी सि क्यों है?
बाबा नयी कब लायेंगे ?
हम भी “सब्जी-रोटी कब खायें”गे !!
माँ मुझे मरने मत देना
इस धरती पे आने देना !
माँ तुझे माँ कहना है
हा कलको मुझे भी माँ बनना है!!
अरे!बाबा किसको साथ लाये है ?
अच्छा! तो  वैध जी आये है
वैध जी ने ये क्या दवा बनाया?
माँ और बाबा तुमदोनो को क्यों रोना आया?
माँ तुमको क्यों ये पीना था ?
माँ मुझको भी जिना  था
आह! आह! आह!
माँ मुझको भी जिना था
 (c) vishal shresth
note- image credit is given unknown

4 thoughts on “माँ मुझको भी जिना था

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