धज्जिया उर गयी शराफत की जब (uttrakhand disaster )

धज्जिया उर गयी शराफत की जब ।
नेताओ ने   वहा लाशो पे भी सियासत की ॥
गिद्ध-बाजो की तरह आसमान में विचरे तुम जब ।
जमीन पे हजारो की ऑंखें नाम थी ॥
श्रेय लेने की होर में लरते रहे तुम जब।
कितने ही घरो में छायी मातम थी ॥

धन्य है वो सेना की जवान जिन्होंने ।
पिरितो को देवदूत सी मदत की ॥
एक सवाल उठा है मेरे मन में ए-विशाल !
पिरितो के घाव पे क्यों न उन्होंने  मरहम की ॥
धज्जिया उर गयी शराफत की जब ।
नेताओ ने  वहा लाशो पे भी सियासत की ||
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note- pics may be subject of copyright , poem is written by vishal shresth

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