अलविदा टेलीग्राम ( good bye telegram )

अलविदा टेलीग्राम

टेलीग्राम आया है ! इस शब्द को सुनते ही लोग उत्सुक हो जाते , कभी-कभी डर और कभी हर्ष की स्थिति हो जाती थी बाकि टेलीग्राम पढने के बाद ही लोगो को वस्तुस्थिति का भान होता था  । मैंने जो ज्यादातर टेलीग्राम देखे या सुने है उनमे जयादातर दुखद सन्देश या बुलावे का सन्देश ही होते थे।

संभवत: सन १८ ५० में अंग्रेजो द्वारा व्यापार और अपने जरूरतों के लिए टेलीग्राम सेवा की शुरुवात की थी जो सन १९ ८ ४ में आमआदमी के लिए भी उपलब्ध हो गयी और कुछ ही समय बाद ये काफी लोकप्रिय हो गया, Imageसन १९६०-७० के फिल्मो में टेलीग्राम से खुशिया  और नौकरिया आदि मिलने को भली-भांति दिखाया गया। वेसे फिल्मो में कबूतरों के द्वारा भी संदेशो का आदान-प्रदान दिखाया गया है,
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इधर टेलीग्राम पर इतने भरोसे की वजह थी इसकी सटीकता, लेकिन बदलते दौर में तकनीक के आगे टेलीग्राम सेवा पिछड गई और अब जमाना मोबाईल का है. जहां सिर्फ 1 पैसे में देश के किसी कोने में संदेश भेजे जा सकते हैं, बात की जा सकती हैं तो वहीं 30 शब्दों का एक टेलीग्राम भेजने के लिए 28 रुपए लगते हैं.

और आज (१४ जुलाई) १६३ साल बाद रात्रि के ९ पीएम के बाद ये सुविधा समाप्त हो जायेगि।
thanks
vishal
note- pics are taken by google search, it may be the subject of copyright

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