Bhagat Singh – the real hero & Delhi Government

जब भी भगत सिंह का नाम आता है सभी देश-वासियों का सर गर्व और श्रद्धा के साथ ऊँचा  हो जाता है, बरे खुसनसीब थे हम जो भगत जी जैसे देश-भक्त हमारे लिए अंग्रेजो से लरे और हँसते -हँसते फासी पे शहीद हो चले।

पर लगता है की देल्ली के शिला सरकार को भगत सिंह से जयादा भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वाले (सर) शोभा सिंह  खुशवंत सिंह के पिता पे मेहरबान है,
भगत सिंह के खिलाफ गवाही देने वाले ‘ सर ‘ शोभा सिंह के नाम पर नई दिल्ली के विंडसर प्लेस का नामकरण करने की गलती/जिद पे है  दिल्ली सरकार ।(दो लोगो ने भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी, एक थे- शादी लाल दुसरे शोभा सिंह । ) खुश्वंत सिंह को तो आप जानते ही होंगे,
बहुत सारे लोग इस बात से सहमत नही होंगे की शोभा सिंह ने भगत जी के खिलाफ गवाही दी थी, मगर खुद खुस्वंत सिंह अगर कह रहे है तो फिर आप क्या सोंचेंगे

मेरे पिता ने तो सिर्फ भगत सिंह की सिर्फ शिनाख्त की थी। उसे फांसी हो गई तो इसमें उनका क्या कसूर…? : खुशवंत सिंह

खुशवंत सिंह और उनके पिता ‘ सर ‘ शोभा सिंह

 खुद कांग्रेस नेता मनिंदर जीत सिंह बिट्टा ने दिल्ली सरकार के इस कदम को बेहद अफसोस-जनक और गैर जरूरी करार दिया।भारत की आजादी के इतिहास को जिन अमर शहीदों के रक्त से लिखा गया है, जिन शूरवीरों के बलिदान ने भारतीय जन-मानस को सर्वाधिक उद्वेलित किया है, जिन्होंने अपनी रणनीति से साम्राज्यवादियों को लोहे के चने चबवाए हैं, जिन्होंने परतन्त्रता की बेड़ियों को छिन्न-भिन्न कर स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया है तथा जिन पर जन्मभूमि को गर्व है, उनमें से एक थे — भगत सिंह।यहां तक कि जवाहरलाल नेहरू ने भी अपनी आत्मकथा में यह वर्णन किया है– “भगत सिंह एक प्रतीक बन गया। सैण्डर्स के कत्ल का कार्य तो भुला दिया गया लेकिन चिह्न शेष बना रहा और कुछ ही माह में पंजाब का प्रत्येक गांव और नगर तथा बहुत कुछ उत्तरी भारत उसके नाम से गूंज उठा। उसके बारे में बहुत से गीतों की रचना हुई और इस प्रकार उसे जो लोकप्रियता प्राप्त हुई वह आश्चर्यचकित कर देने वाली थी।”

और इसे महान सपूतो के सम्मान में हम क्या कर रहे है ,क्या हम भगत के बलिदान को बस इतनी ही इज्जत देते है की बस दो-चार जगह उनकी मूर्ति लगवा दी और हमारा काम ख़त्म । नहीं हमें जागना होगा और उनकी शहादत को ता-उम्र याद रखना है अपने दिलो में |

आइये अब खुस्वंत सिंह की बात करे

दिलचस्प बात यह है कि खुद खुशवंत सिंह ने  कुबूल किया है कि उनके पिता ने भगत सिंह के किलाफ गवाही दी थी। उन्होंने यह स्वीकारोक्ति 1997  में मचे ऐसे ही हंगामे के बाद अंग्रेजी पत्रिका आउटलुक की एक प्रशनोत्तरी में की थी। यह स्वीकारोक्ति 13 अक्तूबर सन् 1997 के  अंक में छपी थी। वो इस प्रकार थी —————-

Did you know about the existence of records where your father deposed against Bhagat Singh?

(क्या आपको उन दस्तावेज़ों का पता था जिनके मुताबिक आपके पिता ने भगत सिंह के खिलाफ़ गवाही दी थी?)

Of course, I knew.It was an open trial.

(निस्संदेह, मुझे पता था। यह एक खुला मुकद्दमा था।)

Were you aware of these events as they unfolded?(क्या जो बातें सामने आईं उनका आपको पता था ?)

All this was published openly in the papers.(यह सबकुछ खुलेआम अखबारों में छप चुका था।)

Did you ever ask your father about it? (कभी आपने अपने पिता से इस बारे में पूछा था?)

After he came back from the assembly, all that was discussed was the bomb-throwing incident. Of course, at that point he did not know who the two boys were.

(जब वो असेंबली से वापस आए थे तो बम फेंके जाने की खूब चर्चा हुई थी। यकीनन, वे उस वक्त उन लड़कों को नहीं पहचानते थे।)

What was the exact sequence of events? (उस वक्त क्या घटनाक्रम हुए थे?)

My father, Sir Shobha Singh, was in the visitor’s gallery when the bombs were thrown. He was asked to identify the two men, which is what he did. BhagatSingh pleaded guilty so what could my father do? Anyway they were sentenced for killing Saunders, not for this incident.

(जब बम फेंका गया था उस वक्त मेरे पिता सर शोभा सिंह दर्शक दीर्घा में थे। उन्हें दो लोगों की शिनाख्तकरने को कहा गया था, जो उन्होंने कर दिया। भगत सिंह को दोषी छहराया गया तो इसमें मेरे पिता क्या कर सकते थे? बहरहाल, उन्हें सॉन्डर्स को गोली मारने के लिए फांसी हुई थी, इस घटना के लिए नहीं।)

Did your father in his later years feel any regret about his testimony?(क्या आपके पिता ने बाद में कभी अपनी गवाही पर अफसोस जताया था?)

There was national regret when Bhagat Singh was hanged. He’d become a hero by then.

(जब भगत सिंह को फांसी लगी थी तो यह राष्ट्रीय शोक था। वह उस समय तक एक नायक बन चुका था।)

Being a British contractor, do you think your father was anti-nationalist?(एक ब्रितानी ठेकेदार होने के कारण क्या आपको अपने पिता कभी राष्ट्रीयता के विरोधी लगे?)

He was not only a British contractor, he was also the biggest contractor in Delhi.

(वे न सिर्फ एक ब्रितानी ठेकेदार थे, बल्कि वे सबसे बड़े ठेकेदार भी थे।)

Are you angry/embarrassed by what your father did?(क्या आप अपने पिता के कृत्यों से नाराज़शर्मिंदा हैं?)

At that time, we did not feel anything about it. He had only identified them. To insinuate that he got his knighthood for this is rubbish. He was knighted 15 years later.

(उस वक्त हमने इस बारे में कुछ नहीं सोचा था। उन्होंने सिर्फ उनकी (भगत सिंह और राजगुरु) शिनाख्त की थी। कोई अगर ये माने कि उन्हें इसीलिए उपाधि मिली थी, तो यह बकवास है। उन्हें उपाधि (मुकद्दमें के) पंद्रह सालों बाद मिली थी।)

Why do you feel the controversy has been dug up now? (आपको ऐसा क्यों लगता है कि विवाद को अभी उभारा जा रहा है?)

This entire thing is aimed at me. My father died a long time ago, so it doesn’t affect him. This is at the instigation of the saffron brigade.

(यह सभी कुछ मुझपर निशाना साध कर किया जा रहा है। मेरे पिता की मौत बरसों पहले हो चुकी है, इसलिए उनपर तो कोई फर्क पड़ता नहीं है। यह भगवा ब्रिगेड के बढ़ावे पर हुआ है।)

And your reaction to the timing?(और इस टाइमिंग पर आपकी प्रतिक्रिया?)

My writing’s become more and more anti-saffron brigade. I’d written a strong piece when the chargesheet was filed in the Babri Masjid case and this story appeared four days later.

(मेरा लेखन भगवा ब्रिगेड के खिलाफ अधिक से अधिक मुखर हुआ है। जिस दिन बाबरी मस्ज़िद मामले में आरोप पत्र दाखिल हुआ था उस दिन मैंने एक कड़ा लेख लिखा था। यह कहानी उसके चार दिनों बाद सामने आई।)

What do you think of Bhagat Singh? (भगत सिंह के बारे में आप क्या सोचते हैं?)

I thought very highly of Bhagat Singh. I even managed to get his autograph when he was in jail.

(मेरे मन में भगत सिंह के लिए बहुत सम्मान है। मैं तो उनके जेल में रहने के दैरान उनका ऑटोग्राफ भी लेने में कामयाब हो गया था।)

Image

Rare and real snap of Bhagat singh

Vishal shresth

note- pics may be the subject of copyright

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