बिन पैसे सब सून, चाहे कितना ताना-बाना बुन !!

क्या सुखद संयोग है, मेरे जेब में एक  रूपया भी नहीं और न ही कोई बैंक बैलेंस है मगर मैं अगले दो महीने में करीब लाख रुपये इन्वेस्ट कर  व्याप|र करने की सोंच रहा हु , अब आप कहेंगे सोचने का तो पैसा लगता नहीं है! सोचो!  खूब सोचो!!

जनाब सोचने के साथ साथ कदम भी बढा  रहा हु, सफलता का पता नहीं पर मुझे अमिताब बच्चन का वो प्रसिद्ध संवाद याद आ गया – मेरे जेब में एक फूटी कौरी भी नहीं, और मैं आपसे 5 लाख का सौदा करने आ गया।
अब मन में ये विचार आ सकता है की लाख रूपया में देल्ही में भला कोई व्यापार हो सकता है । जी हा! मैंने भी खूब सोचा की क्या और कैसे कम पैसे में व्यापार करू?
और बरे-बुजुर्ग भी कह गए है की व्यापार वही करो जिसमे आपकी व्यक्तिगत रूचि हो या पारिवारिक व्यापार हो।
पारिवारिक ब्यवसाय तो कुछ है नहीं, न ही धन-दौलत मिली परिवार से, अब रूचि की बात पे आउ  तो ऐसी कोई रूचि भी नहीं, पैसे भी नहीं और अनुभव भी नहीं ।
फिर मुझे याद आया की कुछ माह पहले मैंने एक पग (वोडाफोन वाला कुत्ता) लेने का विचार किया था , करीब एक महीने तक दोस्तों और इन्टरनेट की खाक छानने के बाद भी मेरे पहुच के हिसाब से 5000-6000 रुपये में एक पग नहीं मिला, आखिर थक हर के मैंने विचार त्यागा और एक जर्मन स्पिट्ज (पामेरियन) लिया, उस प्यारे पप्पी का नाम रखा सूजी,
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सूजी 18 डिसेम्बर 2012 की थी, मैंने 21 जन को अपने पास गोद लिया,

और मैंने अब सोचा,  की कमाल है! एक छोटा सा पग 6000 में भी नहीं मिलता डेल्ही में बल्कि 9000-12000 मांगते है लोग,
हा! कम|ल है ।
मेरी रूचि सुरु से कुत्तो में रही, पलना भी चाहता था और उनके नखरे भी उठा सकता हु, फिर क्यों न इसे ही अपनी वयवसाय बना लिया जय, रूचि भी है और बजट के हिसाब से भी इंतजाम हो जायेगा।
दोस्तों को बताया तो कोई हसे और कुछ ने कहा यार देख ले कर सकता है तो कर। उत्साह किसी ने नहीं बढाया।
पर विशाल बाबु ने तो ठान  लिया था। अब येही काम  करूँगा । मगर पैसे ? ये कहा  से आयेंगे?
बिन पैसे सब सून, चाहे कितना ताना-बाना  बुन  !!

इस व्यापार की सुरुवात में कम से कम 2,3 पग की जरुरत तो होगी ही, बाकि उनके ही बच्चो से वयवसाय आगे बढाया जायेगा।
पहला पग मैंने 20 फेब को लिया नाम रखा मैगी
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, आधे पैसे दोस्त से लिया और आधे खुद उस पग वाले भैया ने उध|र में दे दिए, सच है ! आप कदम बढ़ाते हो तो राह बन ही जाती है, ऊपर वाले की दया से क|म खुद-ब-खुद बन गया,  इस बीच मेरी जॉब भी जारी है, सायद 2 या 3 महीने बाद अपनी कोई ढंग की शॉप या फार्म हाउस टाइप कुछ किराये पे ले लू
कोशिश जारी है और आप सभी के सलाह और दुवा की जरुरत है
विशाल श्रेष्ठ
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