manokaman temple (natural view)

manokamna maay(manokamna mother)

manokamna maay is a hindu holy place, were we go for worship, it is beautiful hill place, natural look ,tree mountain , cloud historical place and heritage buildings with cable car facility, specially for kids its a great adventure  spot  picnic at gorkha near kathmandu nepal, hieght is 1300 fit

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ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होई – love is god – love is all-around

प्रेम-प्यार-इशक़-माया-अनुराग-प्रीत और न जानें कितने नाम है इस पवित्र रिस्ते के , न जानें कितने तरह के भाव है
न तो कोई सीमा है न कोई बंधन है , ये तो बस उरना जनता है प्यार बाटना जानता है !
पोथी-पोथी पढ़ जग मुआ , पंडित भया न कोई
ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होई !!
कबीरदास ने क्या सही कहा था , मैं तो नत मस्तक हु उनके इस विचार पे , इस सन्देस पे !
प्रकृति ने या उस नीले छतरी वाले ने कोई बंदिसे बन्दों पे नही लगायी ये तो हम है जिन्होंने मानव को मानव से बाटा,
पहले धर्म के नाम पर, फिर जात के नाम पर फिर रास्ट्रीयता के नाम पर, रंग-भेद के नाम पर फिर बाटा आमिर-गरीब के नाम पर
, बस बाटते रहे – बस बाटते रहे, और जिन्होंने भी जोरने का प्यार का धागा पिरोने का कम किया उन्हें पागल घोषित कर दिया !
खैर यहाँ मैं अपने पे आता हुँ !
मैं काफी खुस था अपने प्यार में , बरा भरोसा था, साथ जीने-मरने कि कस्मे भी दोहराता था
मगर आज से ११ साल पहले सिर्फ इसलिए मुझे छोर दिया गया ( शायद ) क्युकी मेरा सरनेम श्रेस्ठ था
और उनका कुछ और ……….
न उम्र कि सीमा हो न जन्म का हो बंधन – जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन …………………………………………

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और हम आज भी उनके है
विशाल श्रेस्ठ

Lord Buddha Born here – Lumbini (my visit)

I want to be a traveller, I love travelling but somehow I am not able to travel the hole world, I  just came from lumbini -the place where lord Buddha born

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the place were lord born – taken by google , coz photography not allowed there –  Image

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lord buddha born in lumbini nepal rupandehi district 623 and 543 BCE, mayadevi temple is the place were lord born, its a beautiful place to visit for worship

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there are 32 temple in this place, from different  countries, burma, thai,nepal, lanka, india, germany……  all of us love to visit

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the holy tree were lord take first samdhi

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thanks for visiting

vishal shresth

Hariyali Teez( हरियाली तीज) -Holy Festival of India

हिन्दुओ का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व हरियाली तीज की हार्दिक बधाई,हरियाली तीज को तीज , छोटी तीज ,श्रावण तीज या सावन तीज भी कहते है, शुक्ल पक्छ के त्रित्या (३) को नाग-पंचमी के २ दिन पहले मनाया जाता है,Image

हरियाली तीज भगवान शिव और माँ पार्वती के नाम पर मनाया जाता है,

Imageशादी-शुदा महिलाये वरत करके अपनी सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती है, आज के दिन नए कपरे पहन,हाथो को मेहन्दी से सजा चुरिया आदि श्रृंगार कर सज-सवरती है,

Imageखुशीया भरे तीज गीत गाकर दिन गुजरता है, कई जगहों पे खास कर पंजाब-हरियाणा में तो महिलाये झूलो पे गा-गाकर खुशिया मानाते है ,

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चढ़ावे में सुहाग सम्बंधित भोग लगता है,साथ में कम से कम १३ प्रकार के मिस्ठान चढ़ाया जाता है, जिसमे घेवर प्रमुख है,

hARIYALI

आप सभी को इस पावन पर्व की शुभकामनाये

note- pics may be the subject of copyright, image credit- google search

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग – संकट में हजारों साल पुराना ज्योतिर्लिंग ( omkareshwer jyotirling ) khandwa

संकट में हजारों साल पुराना ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर
भोले के भक्तों के लिए ये खबर मायूसी भरी है. ओंकारेश्वर के हजारों वर्ष पुराने स्वयंभू ज्योतिर्लिंग का तेजी से क्षरण हो रहा है. वजह बताई जा रही है जलाभिषेक और केमिकल मिली पूजा सामग्री का इस्तेमाल. संत, पुजारी और श्रद्धालु सब दुखी हैं. पढ़ें मुश्किल में पड़ी आस्था के बारे में ये स्टोरी…मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर के हजारों वर्ष पुराने स्वयंभू ज्योतिर्लिंग में इतनी तेजी से क्षरण हो रहा है कि अब इसके अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है. निराकार स्वयंभू ज्योतिर्लिंग के अंश टूटकर गिर रहे हैं, लेकिन इसे रोकने के कोई गंभीर प्रयास अब तक नहीं हुए हैं. संत-महात्माओं, पंडित-पुजारियों और भक्तों को इसकी चिंता सता रही है, लेकिन सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है.

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में पहली बार जब वर्ष 1996 में शिवलिंग का एक टुकड़ा निकलकर अलग हुआ, तब मंदिर प्रशासन का ध्यान इस ओर गया. मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरिसिंह चौधरी कहते हैं, ”इसके बाद से लगातार पूजन-अभिषेक के दौरान ज्योतिर्लिंग के छोटे-छोटे अंशों के क्षरित होने की शिकायतें आती रहीं. ” भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के इंजीनियर्स, आर्कियोलॉजिस्ट और एक्सपर्ट की मदद से 5 मई, 2004  को इस पर लेप लगाकर संरक्षित किया गया. इस ताकीद के साथ कि इसे कम-से-कम एक माह पानी से बचाया जाए. जब श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक से रोका गया तो खासा विरोध हुआ और प्रशासन ने एक सप्ताह में ही रोक हटा ली. उसके बाद से क्षरण और तेज हो गया.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पंकज शरण कहते हैं, ”समय से पहले पानी डालने से ट्रीटमेंट ही बेअसर हो गया. ” शरण का कहना है कि यह ज्योतिर्लिंग सैंड स्टोन का है, जिस पर दूध, पंचामृत, फूल, बेलपत्र के चढ़ावे से यह जलाधारी में रिसकर इकट्ठा होता है. फिर सडऩे से लेक्टिक एसिड बनता है, जिसने इसे काफी नुकसान पहुंचाया. इसे और क्षरण से बचाना है तो ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक पूरी तरह रोकना होगा. ओंकारेश्वर षड्दर्शन संत समाज के अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद पुरी इससे सहमत नहीं हैं. वे कहते हैं, ”ज्योतिर्लिंग को सर्वाधिक नुकसान केमिकल लेप से हुआ. वरना यहां तो अनादिकाल से जलाभिषेक हो रहा है. ”  

दरअसल इस मामले में खासा बवाल तब मचा, जब ट्रस्ट के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वामी तेजानंद ने 29 जून, 2006 को मीडिया में यह बयान देकर खलबली मचा दी कि यह ज्योतिर्लिंग खंडित हो चुका है. इसलिए इसे नर्मदा में तिरोहित कर नया शिवलिंग स्थापित किया जाना चाहिए. इस बात को लेकर सारे संत-पुजारी और श्रद्धालु आक्रोशित हो गए और ट्रस्ट की यह घोषणा करनी पड़ी कि इसी ज्योतिर्लिंग को संरक्षित किया जाएगा. मैनेजिंग ट्रस्टी राव देवेंद्र सिंह कहते हैं, ”ज्योतिर्लिंग कभी भी खंडित नहीं होता. यह कोई मूर्ति नहीं है. यह निराकार रूप में प्रकट हुए साक्षात् भोलेनाथ हैं. ”

खंडवा के कलेक्टर नीरज दुबे कहते हैं, ”क्षरण को लेकर सभी चिंतित हैं. अब इसे शास्त्रोक्त तरीके से रोकने के उपाय जरूरी हैं. ” दरअसल अभी तक ट्रस्ट ने सतही उपाय किए, जिसमें ज्योर्तिलिंग पर पहले दूध-पंचामृत, पुष्प को  प्रतिबंधित किया गया. फिर सीधे जलाभिषेक भी. अब श्रद्धालु कलश में जल भरकर एक फाइबर के टब में उड़ेल देते हैं और फिर तांबे के पाइप से भोलेनाथ को जलधारा चढ़ती है. केरल से यहां दर्शन करने आए रामास्वामी दुखी मन से कहते हैं, ”न तो भगवान के ठीक से दर्शन हो पा रहे हैं और न ही अभिषेक. ” यहां के पुजारी डंकेश्वर दीक्षित कहते हैं, ”अब जलाभिषेक की अवधि भी सीमित कर दी गई है. इसके बावजूद क्षरण जारी है.

द्वारका पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने स्पष्ट अभिमत दिया कि इस पर स्वर्ण या रजत का आवरण बनाकर ढक दिया जाए. फिर उस पर अभिषेक संभव है. दूसरा विकल्प यह है कि ज्योतिर्लिंग की सिर्फ त्रिकाल पूजा हो और श्रद्धालुओं के लिए पृथक शिवलिंग अभिषेक के लिए स्थापित कर लिया जाए. इधर पुजारियों का सुझाव है कि स्फटिक का पारदर्शी आवरण हो, जिससे भगवान के दर्शन संभव हों.

इन सुझावों को ट्रस्ट ने कलेक्टर के माध्यम से प्रदेश के संस्कृति विभाग को मार्गदर्शन के लिए भेज दिया, लेकिन वहां से तीन वर्षों में भी कोई जवाब नहीं आया. इस क्षेत्र के पूर्व विधायक राजनारायण सिंह कटाक्ष करते हैं, ”मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तीर्थयात्राएं करवाकर वोट जुटाने की जुगत में हैं, लेकिन उन्हें अपने प्रदेश के ही तीर्थस्थलों के संरक्षण में रुचि नहीं है. ” आगामी सिंहस्थ 2016 के मद्देनजर प्रशासन ने ओंकारेश्वर के विकास के लिए 160 करोड़ रु. की भारी-भरकम योजना तो बना डाली, लेकिन ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए इसमें कोई प्रस्ताव ही नहीं है. जाहिर है भगवान की चिंता किसी को नहीं है. ”

from–जय नागड़ा | सौजन्‍य: इंडिया टुडे | खंडवा, मध्य प्रदेश, 23 जुलाई 2013 | अपडेटेड: 17:35 IST

Raam a Global development currency at Holland ( राम एक वैश्विक विकास मुद्रा )

Raam is a Bearer Bond or local currency (note-its not a Currency of Holland) issued by  Stichting Maharishi Global Financing Research (SMDFR), a charitable foundation based in Holland The Raam was launched on October 26 2001, The Global Country of World Peace, set up by the Indian mystic, issued the brightly coloured notes of one, five and 10 “Raam” .

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(front side of 1 Raam)Image

(back side of 1 Raam)

Maharshi Mahesh known first as a guru of Beatles in the 1960s, the Maharishi Mahesh Yogi has 4 million followers worldwide who believe that a diet of meditation and organic foods is the path to personal enlightenment and world peace.

the Guru Maharshi Mahesh start this currency with the name of Lord Raam cause he believe in Ram-RAJYA and he is a  great devote of Lord Ram

Since then, more than 125 Dutch shops and few shops in Usa also, some of them part of big department store chains, in 30 villages and cities have accepted the notes.

A spokesman for the Dutch Central Bank told BBC News Online the bank was keeping a close eye on the “Raam”, although he added that the Maharishi movement had done everything according to the law.

“The “Raam” can be used as long as the notes are not used as legal tender and it stays within a closed-off circuit of users,” he said.

The Raam is also circulating as the currency of Maharishi Vedic City in the US state of Iowa together with the US dollar, while Raam-based bonds are being offered in 35 American states.

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(Bond Raam)

Benjamin Feldman, ‘Minister of Finance’ of the Maharishi movement, told BBC News Online the Raam could be used to battle poverty and create world peace.

In the Netherlands, the Raam notes are accepted in Dutch shops at a fixed rate of 10 Euros per raam.

“There are now about 100,000 Raam notes in circulation. That is not a lot but we are keeping a close eye on it because it must never lead to confusion for the public,” the Dutch central bank spokesman said.

Shopkeepers can exchange their Raam notes at the Fortis Bank branch in Roermond.they are trying to open many center  or money exchange shop for Raam.

i personly very happy to know that holland government has no problem by Raam, its a great work by  Maharishi Global Financing Research.

Jay shree Raam

जय श्री राम

Regards

Vishal Shresth

note- source from bbc and different websites from  Maharishi Global Financing Research & others

valentine week (a week for love, peace n humanity)

Hi friendshere comes the valentine week, a week for love, a week for peace and a week for humanity, most of us known about this week, valentine week, according to the story this week or valentine day is dedicated to Great saint valentine for his sacrifice for love,Image  St valentine church Dublin Ireland

why we enjoy this like a festival? there are lots of story but the most popular and personally i believed that- saint Valentine was a priest, who served during the third century in Rome. When Emperor Claudius II decided that single men made better soldiers than those with wives and families, he outlawed marriage for young men. Valentine, realizing the injustice of the decree, defied Claudius and continued to perform marriages for young lovers in secret. When Valentine’s actions were discovered, Claudius ordered that he be put to death, and saint happy decided to to go for love and peace,

now these days there are some fixed date for different occasion like- Image   

.  Feb 7: Rose day
.Feb 8: Propose day
.Feb 9: Chocolate day
.Feb 10: Teddy Day
.Feb 11: Promise Day
.Feb 12: Hug Day

.Feb 13: Kiss Day
.Feb 14: Valentine Day

start from a rose and end with a valentine great week for teenagers  and single people,love is God,                                                                              but   for me my valentine is my MOm, i love u mom, and u are the best valentine  for me, i want a sweet kiss in my forehead, a tight hug and i promise that i love u forever and ever n ever , no matter my girlfriend/wife  is to busy with me and my  child’s/kid’s need attention and love,

happy valentine for all of u my sweet friends , enjoy the week and give love peace to the world

Regards vishal shresth

note- image credits goes to Wikipedia and others

Lord Budhha

who is lord Buddha? and where the great Budhha born?

Budhha – The term Buddha means “Awakened”. As he fully comprehended the Four noble truths and as he arose from the slumbers of ignorance he is called a Buddha. Since he not only comprehends but also expounds the doctrine and enlightens others, He is called a Samma-Sambuddha –“a Fully Enlightened One”  ImageArchaeological zone in the sacred garden © UNESCO Lumbini (NepaL)

According to http://whc.unesco.org/en/list/666 , http://en.wikipedia.org/wiki/Gautama_Buddha    and other proof it is very clear that Lord Buddha born in Lumbuni Nepal , but there are many contravercy  created by some peoples , personally I dnt care where Lord Buddha (sorry Dear friends) is born but its dnt mean that I dnt Respect Lord Buddha, ie respect him and I believe him. I am hindu and have full faith in my religion , some time I confused that Lord Buddha is a Lord Vishnu avatar or not, acording to many holy book written by different yogi and shri Shankaracharya Lord Buddha  is Vishnu avatar, but here I dnt want to discuss about that, here I am going to wrote about were lord Buddha born and a short note about the Great Lord Buddha

“Hard is it to be born a man; hard is the life of mortals. Hard is it to gain the opportunity of hearing the Sublime Truth, and hard to encounter is the arising of the Buddhas.~ Dhammapada 182”

The Shakya Prince Siddharta Gautama, better known as the Lord Buddha, was born to Queen Mayadevi, wife of King Suddodhana, ruler of Kapilavastu, in 623 BC at the famous gardens of Lumbini, while she was on a journey from her husband’s capital of Tilaurakot to her family home in Devadaha.

As the birthplace of the Lord Buddha – the apostle of peace and the light of Asia was born in 623 BC – the sacred area of Lumbini is one of the holiest places of one of the world’s great religions, and its remains contain important evidence about the nature of Buddhist pilgrimage centres from a very early period. Lumbini, in the South-Western Terai of Nepal, evokes a kind of holy sentiment to the millions of Buddhists all over the world, like Jerusalem to Christians and Mecca to Muslims.

Lumbini is the place where the Buddha, known as the Tathagata, was born. It is the place which should be visited and seen by a person of devotion and which should cause awareness and apprehension of the nature of impermanence. The site and its surrounding area is endowed with a rich natural setting of domesticable fauna and favourable agricultural environ. Historically, the region is an exquisite treasure-trove of ancient ruins and antiquities, dating back to the pre-Christian era. The site, described as a beautiful garden in the Buddha’s time, still retains its legendary charm and beauty.

The birthplace of the Gautama Buddha, Lumbini, is one of the four holy places of Buddhism. It is said in theParinibbana Sutta that Buddha himself identified four places of future pilgrimage: the sites of his birth, Enlightenment, First Discourse, and death. All these events happened outside in nature under trees. There is no particular significance in this, other than it perhaps explains why Buddhists have always respected the environment and natural law.

Lumbini is situated at the foothills of the Himalayas in modern Nepal. In the Buddha’s time, Lumbini was a beautiful garden full of green and shady sal trees (Shorea robusta ). The garden and its tranquil environs were owned by both the Shakyas and the clans. King Suddhodana, father of Gautama Buddha, was of the Shakya dynasty and belonged to the Kshatriya (warrior caste). Maya Devi, his mother, gave birth to the child on her way to her parent’s home in Devadaha while resting in Lumbini under a sal tree in the month of May, 642 BC. The beauty of Lumbini is described in Pali and Sanskrit literature. Maya Devi, it is said, was spellbound to see the natural grandeur of Lumbini. While she was standing, she felt labour pains and catching hold of a drooping branch of a sal tree, she gave birth to a baby, the future Buddha.

In 249 BC, when the Indian Emperor Ashoka visited Lumbini, it was a flourishing village. Ashoka constructed four stupas and a stone pillar with a figure of a horse on top. The stone pillar bears an inscription, which in translation runs as follows: ‘King Piyadasi (Ashoka), beloved of devas, in the 20th year of the coronation, himself made a royal visit, Buddha Sakyamuni having been born here; a stone railing was built and a stone pillar erected to the Bhagavan having been born here, Lumbini village was taxed reduced and entitled to the eight part (only)’. Image

Dhâmek Stûpa in Sârnâth, India © Wikipedia

Who is the Buddha?
One may think that the Buddha was a human. But the Buddha denied this too. Once a Brahmin named Dona, approached the Buddha and questioned him.

“Your Reverence will be a deity ?”
“No, indeed, brahmin, a deity am I not,” replied the Buddha.
“Then Your Reverence will be a god?”
“No indeed, brahmin, a god am I not.”
“Then Your Reverence will be a human being?”
“No indeed, brahmin, a human being am I not.”
“Who, then will Your Reverence be?”

The Buddha replied that He had destroyed Defilements which conditions rebirth as a god or a human being and added:

“As a lotus, fair and lovely, By the water is not soiled, By the world am I not soiled; Therefore, brahmin, am I Buddha!”

The Buddha had discovered the path to liberation  from the cycles of continued rebirth  in this world. Out of compassion for the world, he shows the path and method whereby he delivered himself from suffering and death and achieved man’s ultimate goal. It is left for man to follow the path.

Be islands unto yourselves, refuges unto yourselves, seeking no external refuge; with the Dhamma as your island, the Dhamma as your refuge, seeking no other refuge ~ Maha Parinibbana sutta

For me Buddha is a name of peace , Buddha is the name of Humanity , Buddha is the name of faith and yes Budhha is the name of Lord

note- image n data are taken by different other other source

बरसाना

गत साल बरसाना जाने का सौभाग्य  प्राप्त हुआ था राधा-अष्ठमि के सु-अवसर पर्। वेसे पेह्ले भि कइ बार हमे  राधा रानि के दर्शन का सौभाग्य  प्राप्त हो रखा था। इस बार हमारे साथ हमारे मित्र एव्म विधाथि॔ हरिश कुमार भी साथ थे। बरसाना राधे रानि कि जन्म स्थलि, हमारे अराध्य श्री कुन्ञ बिहारि कि ह्रिदय मे विराजमान, राधा के बिना श्याम  को वैसे भि अधुरा मानते है, उन्कि दर्शन मात्र से सारे दुख दुर हो जाते है। उन्के जन्म दिन के शुभ्-अवसर पे राधा-अष्ठमि मनाया जाता है |

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यात्रा कि शुरुवात काफ़ि सुखद रहि,हम दोपह्र से पेह्ले हि मन्दिर मे राधा रानि के दर्शन हेतु पहुँच गये। मन्दिर और यात्रा मार्ग मे कफ़ि भिड़ थी, करिब १० लाख से अधिक श्रधालु उस छोटे से गाव मे दर्शन हेतु आये थे। घोर कु-व्यव्स्था थि, आने जाने के लिये एक हि राह का इस्तमाल हो रहा था, कुछ दर्जन भर पोलिस थे, वो भि या तो खैनि चुनाने मे वयस्थ थे या गपियाने मे, वो अगर धंग से अपनि सेवा देते तो भि ना-काफ़ि होता। कम से कम २०० पुलिस कि व्यव्स्था होना चाहिये थि। खैर ज​एसे तैसे हम दर्शन कर लौट्ने लगे, तब जाके असलि मुसिबत का पता लगा।वापस जाने कि कोइ व्यव्स्था नहि अगर आप निजि वाह्न से ना आये हो तो।उपर से सड्क भि जाम कि वजह से बन्द पड़ा था, दो घन्टे के अथक प्र्यास के बाद एक औटो वाले ने तिगुने किराये पे बरसाने के बाहर ले जाने को राजि हुए, आप्को शाय्द ग्यात हो वहा के सड़्को कि हालात क्या है, वहा के सड़्को कि हालात  से उत्तर प्रदेस कि हालत सम्झ सकते है।

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उसि दिन हमे आशंका हुइ॔ थी कि कोइ दुर्घत्ना ना घट जाये और आज खबर आ रहि है कि मंदिर में भक्‍तों की ज्‍यादा भीड़ होने के कारण अव्‍यवस्‍था फैल गई, जिससे दुख्:द हादसा हुआ दो महिला भक्तो कि दुख्:द मृत्यु और दर्जन भक्त घायल हो गये। स्थिति सामान्‍य करने की कोशिश की  जा रही है और साथ हि अपनि नाकामि छुपाने क प्रयास भि जारि है पुलिस के द्वारा।गौरतलब है कि हाल ही में वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भगदड़ के कारण ६ लोग जख्‍मी हो गए थे, मगर प्रसाशन को ना तो सुधरना था ना वो सुधरे हि।

ये हालात केवल यु पि के मन्दिरो मे नहि , भारत मे कई जगह येही हालात है। मन्दिर प्रशासन और सरकारि प्रशासन को सम्झ्ना होगा और भक्तो कि सुरक्छा का जिम्मा उठाना हि होगा।

हम धर्म के नाम पे अन्धे हो जाते है और किसि भि हालत मे हम अपने धर्म के नाम पर खतरनाक हालात मे भि सामान्य तौर पे यात्रा करते है। अब हमे भि समझ्ना होगा , हमारे कुछ अधिकार और कर्तव्या भि है, हमे इन बातो पे ध्यान देना होगा और हमे भि अवाज़ उठाना होगा। जहा तक हो सके आप प्रशासन से मिले य लिख कर शिकायत करे,

आशा है कि आगे से भक्तो कि सुरक्छा का धयान रखे और विश्व  प्रसिद्ध बरसाने मे या कहि और भि एसि दुर्घतना न घटे।

हरे कृष्णा!

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