What is name? everything is Surname ! (respect the Surname)

“What is name, everything is surname “

What’s in a name? That which we call a rose by any other name would smell as sweet- William Shakespeare

Sorry Shakespeare sir! You are wrong now!

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Now everywhere in this fake or real world we want to introduce our self with our name and if we have a powerful surname (belongs to powerful family) we pronounce surname proudly, for example (Indian examples)  

1-Rahul Gandhi &  Barun Gandhi (political family)

2-Abhisek bachchan ,  (film industries)

3- Uday chopra (film industries)

4- Rahul Mahajan (political family)

5- Arman kohli (film industries)

6- Anil & mukesh Ambani (industrialist)

and many more name , they are there becoz of their surname only, sometimes they also said that we are here in power coz of our family background, omce Rahul Gandhi said- “ I m here and u are also here to hear my speech as a party vice president, its becoz of my Gandhi surname, otherwise I have to work more hard to get this position, “

yes its true whenever we want to know about somebody we said your good name please , if he/she ask only name , we repeat sir your full name or surname plz, surname helps me/us to know more about his family background or his cast/religion background, dear friends I m Rajpoot (chatriya) if somebody says I m abc singh I like his/her surname ,oh! Singh that’s good! We impress with her/his cast/religion, no matter how good/bad he/she is ……………….,

jok(joke)

The actual meaning of A surname is a name added to a given name and is part of a personal name.In many cases, a surname is a family name and many dictionaries define “surname” as a synonym of “family name”.

That’s why I said this is a fake world we believe in fake identity , we don’t love human we love his background we love his/her surname , we love his/her cast & religion and now these days we love his/her political thoughts

So my dear friends what is name everything is surname

vishal shresth 

note-kindly take it easy please

मीडिया समाज का आइना ?

अगर श्री राम के ज़माने में ये मीडिया होती तो ===—
लंका से लौटने पर भगवान राम की प्रेस कोंफ्रंस में
मिडिया द्वारा पूछे गए सवाल
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# आपके टीम के श्री हनुमान को लंका सन्देश देने भेजा था
पर उन्होंने वहाँ आग लगा दी| क्या आपकी टीम में अंदरूनी
तौर पर वैचारिक मतभेद है?# क्या हनुमान के ऊपर अशोक वाटिका उजाड़ने के आरोप में वन विभाग द्वारा मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए?
…# आपके सहयोगी श्री सुग्रीव पर अपने भाई का राज्य
हड़पने का आरोप है| क्या आपने इसकी जांच करवाई?#. क्या ये सच है की सुग्रीव की राज्य हड़पने की साजिश के
मास्टर माइंड आप है?

# आप चौदह साल तक वनवास में रहे| आपको अपने खर्चे
चलाने के लिए फंड कहाँ से मिले?

# क्या आपने उस फंड का ऑडिट करवाया है?

# आपने सिर्फ रावण पर हमला क्यों किया, जबकि राक्षस
और भी थे? क्या ये लंका की डेमोक्रेसी को अस्थिर करने की साजिश थी?

# क्या ये सच नहीं है की रावण को परेशान करने के मकसद से
आपने उनके परिवार के निर्दोष लोगो जैसे कुम्भकरण और
मेघनाद पर हमला किया?

# क्या आपकी टीम के हनुमान द्वारा संजीवनी बूटी की
जगह पूरा पहाड उखाड़ लेना सरकारी जमीन के साथ छेड़छाड़ नहीं?

# क्या ये सच नहीं कि आपने हमले से पहले समुद्र पर पुल
बनाने का ठेका अपने करीबी नल और नील को नहीं दिया?

# आपने पुल बनाने के लिए छोटी छोटी गिलहरियों
से काम करवाया| क्या इसके लिए आप पर बाल श्रम
कानून के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए?

# आपने बिना किसी पद पर रहते हुए युद्ध के समय इन्द्र से
सहायता प्राप्त की और उनका रथ लेकर रावण पर हमला किया|
क्या आप इन्द्र की टीम ए है?

# इस सहायता के बदले में क्या आपने इन्द्र को ये वादा नहीं किया
की अयोध्या का राजा बनने के बाद आप उन्हें अयोध्या के आस
पास की जमीन दे देंगे?

# आप युद्ध में अयोध्या से रथ न मंगवा कर इन्द्र से रथ लिया
क्या ये इन्द्र कि कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया?

# क्या आपने जामवंत को सहायता के बदले राष्ट्रपति बनाने का वादा नहीं किया?

Image#  और आखिरी सवाल, की आपके रहते भरत को राजा बनाया गया| क्या आपकी नेतृत्व क्षमता पर दशरथ जी को संदेह था?.
                                                                                                                     अज्ञात!
इस पोस्ट  पे मेरा किसी भी प्रकार का कोई कॉपीराइट नहीं है, , साथ ही ये भी बता दू की मेरा किसी की भी भावना पे चोट पहुचने का कोई मंशा नहीं है केवल एक जोक के तौर पर ही ले  धन्यवाद्
विशाल श्रेष्ठ