Surgical Strike

Finally after a long time Indians shown their power. the hole world knows that Pakistan is country which always support terrorism. Pakistan is also victims of many terrorist attack.
In India, when the Modi government came in power we the people’s are waiting for an action against Pakistan,because they promise so many time that they are going to teach some lesson to pakistan.

Nearly 10 days after the Uri attack that claimed 18 jawans, India carried out surgical strikes in Pakistan Occupied Kashmir, inflicting heavy casualties on terrorists and ‘those protecting them” and indicating a change of stand on the rules of engagement on the disputed line of control.

Indian DGMO Lt Gen Ranbir Singh announced that Pakistan had been informed about the strikes and that India has no intention of continuing the operation. after this Pakistan arrange a cabinet meeting after this so called Surgical Strike and give a statement that this is totally fake. Isn”t it ?

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Here I am going to describe you how Indians finished his excellent operation 9according to many news agency)  

1. Operation begins around 12.30 am on Wednesday. According to reports, paratroopers from Special Forces were involved.

2. The commandos were airdropped at the LoC, from where they crossed over to the Pakistani side.

3. According to sources, Indian commandos entered three Km across the Line of Control to conduct the ‘surgical strikes’

4. The strikes were carried out in Bhimber, Hotspring, Kel & Lipa sectors, on Pak’s side of LoC, according to reports.

5. The location was 500 meters-2 Km across LoC, sources said

6. 7 terror launch pads were destroyed during the surgical strike

7. 38 terrorists and 2 Pakistani soldiers were killed in Indian Army surgical strikes, no Indian casualties. Those killed included terrorists, their guides and handlers

8. Helicopters were used.

we hope that in coming days we live our life in peace but Pakistan may have different plan
let see!

 

 

Shresth Vishal

गाँधी बनाम मुर्ख वर्ग (Gandhi vs fool )

गाँधी बनाम मुर्ख
आजकल एक नया युवा वर्ग सामने आ रहा है (संख्या में कम है मगर परेशानी क सबब भी है)
ये दो-चार मूर्खो की किताब और नेट पे लिखी कुछ बकवास पढ़ कर खुद को महाज्ञानी समझ बैठते है।
ये गांधीजी को पसंद नहीं करते, कोई बात नहीं आपका अधिकार है आप जिसे चाहे न-पसंद करे , मगर इनके कुछ तर्क सुनकर हँसी आ जाती है और युवा वर्ग की सोच पे दया भी आ जाती है,
कुछ तर्के इस प्रकार है-
१-सुभाष चन्द्र बोश ने कांग्रेस गांधीजी के कारन छोरा – जवाब – सुभाष जी खुद गाँधी जी का आदर करते थे और नरम दल और गरम दल में से उन्होंने बाद में गरम दल चुना ।
२- भगत सिंह मेंरे आदर्श है और गाँधी भगत के खिलाफ थे,- जवाब- भगत जी ने खुद गांधीजी के प्रयासों के कायल थे और सभी उस समय के कांग्रेसी नेताओ के समर्थक थे, मगर वो पूर्णता अहिंसावादी नही थे और उन्होंने अपना अलग राह चुनी और अमर हो गये।

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३-सुभास जी को गाँधी जी ने कांग्रेस प्रमुख पद से हरवाया- जवाब – गांधीजी अहिंसा के समर्थक थे और कुछ समय बाद सुभास जी गांधीवादी धारा से कांग्रेस को अलग करना चाहते थे, मगर सुभास जी ने खुद को पाया की वो यहाँ रह-कर देश को आजाद नहीं कर पाएंगे और सभी जानते है वो गरम दल/धारा के पक्छधर थे,वे खुद ही कांग्रेस छोर चले न की उन्हें किसी ने बाहर का रास्ता दिखलाया ।

४- हिंदुस्तान से  मुसलमानों को उन्होंने नहीं जाने दिया, जवाब-कोई भी कांग्रेस नेता या और देश-भक्त नही चाहता था की देश के और टुकरे हो , अगर आपको थोरा सा भी ज्ञान हो तो पता होता की पाकिस्तान धर्म के नाम पर भारत में दंगे करवाके देश के कई टुकरे  करना चाहता था, क्या आप चाहते थे की भारत के और टुकरे हो, वैसे भी भारत कभी धरम के नाम पर बटवारे का समर्थक नहीं रहा। 

५-कांग्रेस गांधीजी के नाम पर वोट पाती  है – जवाब- इसमें गांधीजी की क्या गलती , अरे गांधीजी तो खुद कांग्रेस को भंग करना चाहती थे, आपको आपत्ति है तो कांग्रेस की आलोचना करे, गांधीजी की आलोचना क्यों?

६ – कुछ आपत्तिजनक जनक टिपण्णीया भी है जो सामाजिक स्तर पे मैं नहीं लिख सकता, संस्कार आदेश नहीं देते 

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अब मैं उन लोगो के नाम लिखना पसंद करूँगा जिन्होंने गाँधी के आदर्शो को अपनाया है या उनकी तारीफ में सर झुकाया है , 

अन्ना हजारे-गांधीजी युग-पुरष , उनके आदर्शो पे ही मैं चलता हु। ,
अब  सबसे पहले नाम मैं लूँगा पूर्व प्रधान मंत्री का
१-अटल बिहारी वाजपेयी, इन्होने तमाम जीवन गाँधी विचारधारा को अपनाये रखा ।
२- अलबर्ट आइन्स्टीन – इन्होने ओ यहाँ तक कहा की – आने वाले समय में युवा भरोषा नहीं करेंगे की गाँधी नाम का कोई हार-मांस का कोई मानव इस धरती पे थे।
३-बाबा राम देव – गाँधी हमारे आदर्श।
४-मदर टरेसा – कई बार गाधीजी के सन्देश को दुनिया भर में फैलाया ।
५ – रविद्रनाथ टगोर-इन्होने ही तो महात्मा नाम दिया था ।
६-हो-चिन्ह-मिन्ह- कोई भी क्रांति बिना गाँधी के विचार धारा को साथ लिए बिना नहीं हो सकता ।
७-नेल्सन मंडेला-गाँधी ने ही सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखलाया और मैंने जित हासिल की ।
८- बराक ओबामा-गाँधी जीवन से मैंने काफी कुछ सिखा, उनके मार्ग पे चलके ही मैं यहाँ तक पंहुचा ।
९-दलाई लामा-गाँधी के लिए मन में बहुत श्रधा है, मुझे लगता है की वो एक ऐसे महँ इन्सान थे जिन्होंने बुध के सिधान्तो को अपनाया ।
१० – मर्थिन लूथर किंग जूनियर – इसा के सन्देश को गाँधी ने अपनाया, वो एक महा-मानव थे ।
११-नरेन्द्र मोदी – गाँधी जी हमारे गुजरात और देश के गौरव , गुजरात उनके आदर्शो पे ही चल रहा है ।
१२ – जी पि कोइराला-गाँधी विस्व के नेता ।
अन्य बहुत सारे व्यक्ति/नेता है जो गाँधी के अनुयायी है या उनका काफी सम्मान करते है।

आप गांधीजी को पसंद नही कर सकते मगर उनको न-पसंद भी नहीं कर सकते –

विशाल श्रेष्ठ

नेता तू जब-जब जागा है !! (A-POEM)

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नेता तू जब-जब जागा है,
जनता हुआ अभागा है,
हो कोई भी पार्टी सब एक है,
रंग अलग-अलग पर ढंग एक है,
खुसियाली पे लगा ब्रेक है ,
भ्रस्ताचारी सरे अब एक है!!
नेता तू जब-जब जागा है,
हुआ जनता का हर पल शोषण ,
काले-धन से करे खुद का पोषण,
गाँधी,सुभास भगत से नहीं अब
कलमाड़ी,राजा, येदु से होता नाम रौशन
करते एक-दुसरे पे आरोप-रोपण
नेता तू जब-जब जागा है!!
सच कहता तू-ए -विशाल
ये मुल्क बड़। अभागा है॥

by – vishal shresth

ये झारू जरुर चलेगी ! (आम आदमी पार्टी) Aap

ये झारू जरुर चलेगी !,, बहुत दिनों से आम इन्सान इस इंतजार  में थे की राजनीती से ये गंदगी कैसे साफ होगी? कौन करेगा?क्यों करेगा?

चलो फिर आदरनीय अन्ना हजारे के चेलो ने समाज से ये गंदगी साफ करने की बिरा उठाया, मैं खुद इस राजनेतिक दल बनाने के निर्णय से नाखुश रहा और आगे भी खुल कर समर्थन में सायद ही आ सकू।
आम आदमी का नाम ले कर एक राजनेतिक दल बना आम आदमी पार्टी, लाखो लोगो ने हाथो हाथ लिया,और इनके समर्थको की संख्या बढती चली,
शायद  कल को केजरीवाल ये शेर भी सुनाये-” मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर, लोग  साथ आते गये और कारवाँ बनता गया, दहर में ‘मजरूह’ कोई जाविदां मज़मूं कहां , मैं जिसे छूता गया वो जाविदां बनता गया”
अब  जब बात राजनीती से गंदगी साफ करने की हो तो चिन्ह (चुनाव-चिन्ह) भी कुछ ऐसा ही चाहिए, तो लो जी चुनाव आयोग ने भी काफी सोच समझ कर राजनीती से गंदगी साफ करने के लिए एक चिन्ह दिया जो आम-आदमी काफी आराम से इस्तमाल करते है अपने घर की गंदगी साफ करने के लिए, तो अब राजनीती की गंदगी साफ करने के लिए भी येही चिन्ह मिला- झारू!
जी हा ये झारू जरुर चलेगी अब काफी सारे राजनेतिक दलों के समर्थक इसका मजाक उरायेंगे , अरे उनका काम है ये अपने संस्कार तो वो दिखायेंगे ही,
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आप लोग और आप के लोग मुझे अरविन्द समर्थक समझने की भूल न करे वरना भविष्य में दर्द होगा, मैं तो बस दिल की सुनता हु, क्या करू अन्ना जी का चेला हु न|
इधर कुछ दुविधा भी है, राजनेतिक गंदगी को दूर करने के चक्कर में ये कही खुद भी इस गंदगी का हिस्सा न बन जाये,मगर इस डर से एक इमानदार पहल से दूर नही भाग सकते, बहरहाल जो भी हो ये झारू जरुर चलेगी अब गंदगी साफ करने में चले या आम इन्सान की मासूम सोंच पे |
आपका विशाल श्रेष्ठ
note- image credit Google search

कांग्रेस को वोट दो और अपनी जिंदगी बदल दो (vote for congress)

अगर आपको स्लिम-ट्रिम होना है तो कांग्रेस को चुने                                                                              जी हा! मुझे पता है आप भरोसा नहीं करोगे,  आप कहेंगे की ये बंदा राजनीती कर रहा है, मगर ये सच नहीं,

जो दोस्त मुझे जानते है उन्हें पता था की मैं अपने बढ़ते हुए मोटापा से बहुत परेशां था , ऊपर से डाइ-बीटीज हो गयी, मैं बदसूरत लगने लगा था, आत्म -विश्वास ख़त्म हो चुकी थी,, मेरे यार दोस्त मुझपे हँसते  थे मुझे कोई लरकी घास नहीं डालती थी, मेरे सभी दोस्त के गर्ल-फ्रंड थे, पर मैं अकेले था, कोई भी मुझे अपनी पार्टी पे नहीं बुलाता था,दर्जी भी एक्स्ट्रा कपरे और एक्स्ट्रा पैसे मांगता था, मैं डिप्रेस हो गया था, मैं आत्म-हत्या करने की सोचने लगा था
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तभी मनो कमाल हो गया, मैंने टीवी में एक ऐड देखा- कांग्रेस को वोट दो और अपनी जिंदगी बदल दो
हमने कांग्रेस की सरकार  बनवा दी और अब चावल-दाल-टमाटर-प्याज़-दूध सब महंगे हो गए, सच मानिये खाने के लाले पर गए, कितने ही दिन भूखे रहे और नतीजा आपके सामने है – मैं बन गया स्लिम एंड ट्रिम , सच मानिये मुझे भरोसा नहीं हो रहा था की मैं भी दुबला पतला और आकर्षक लग सकता था ।
दिल से— धन्यवाद् कांग्रेस ! सच में तुमने मेरी जिंदगी बदल दी
 …………………….. विशाल श्रेष्ठ
note-pics taken by Google search

धज्जिया उर गयी शराफत की जब (uttrakhand disaster )

धज्जिया उर गयी शराफत की जब ।
नेताओ ने   वहा लाशो पे भी सियासत की ॥
गिद्ध-बाजो की तरह आसमान में विचरे तुम जब ।
जमीन पे हजारो की ऑंखें नाम थी ॥
श्रेय लेने की होर में लरते रहे तुम जब।
कितने ही घरो में छायी मातम थी ॥

धन्य है वो सेना की जवान जिन्होंने ।
पिरितो को देवदूत सी मदत की ॥
एक सवाल उठा है मेरे मन में ए-विशाल !
पिरितो के घाव पे क्यों न उन्होंने  मरहम की ॥
धज्जिया उर गयी शराफत की जब ।
नेताओ ने  वहा लाशो पे भी सियासत की ||
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note- pics may be subject of copyright , poem is written by vishal shresth

देर न हो जाये कही बीजेपी को देर न हो जाये

आज दो खबरों ने मेरा धयान खींचा , एक तो श्री आडवानी जी के घर के बाहर कुछ भाजपा कार्यकर्ताओ ने जो मोदी समर्थन में और आडवानी विरोध में नारे लगाये वो अशोभनीय था, प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि आडवाणी उम्रदराज हो गए हैं और उन्‍हें मोदी के लिए रास्‍ता साफ करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों में शामिल एक साधू ने आडवाणी को अपना ‘चेला’ बताते हुए कहा कि आडवाणी को राष्‍ट्रहित में मोदी का समर्थन करना चाहिए, (मैं यहाँ ये जरुर बता दू की मैं किसी दल या व्यक्ति का समर्थक नही , मैं श्री अन्ना हजारे की बात को मानने वालो में से हू )|  और दूसरा  भाजपा में आडवाणी खेमे के कई नेता गोवा कार्यकारिणी से नदारद हैं। बड़े नामों में जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा, उमा भारती, रविशंकर प्रसाद, शत्रुघ्न सिन्हा और बीसी खंडूरी बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं।आपको बता दू की गोरखपुर से सांसद योगी आदित्य नाथ ने भी आडवाणी के पक्ष मे वकालत की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1996 से 2004 के बीच वाजपेयी और आडवाणी की जोड़ी ने भाजपा का नेतृत्व किया और एनडीए की सरकार बनाई, उसी तरह अब आडवाणी और मोदी को मिलकर काम करना चाहिए। 
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  “” pics-इन-सबसे मिल-जुल कर बना है बीजेपी , एक हो जाये या फिर कही गुजरात की छेत्रिय पार्टी न बन जाये “”
मगर जिस तरह से आडवाणी जी और सुषमा जी पहले दिन के बैठक से नदारद रहे, उससे तो येही दीखता है की घर में ही सब गरबर है,इसी बिच फिर से   किसी जमाने में संघ के थिंक टैंक रहे गोविंदाचार्य ने कहा कि राजनाथ भाजपा के मनमोहन सिंह की तरह हैं। वहीं, राजनाथ ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को संसदीय बोर्ड में शामिल करने के फैसले को सही बताया। गोविंदाचार्य पहले ही कह चुके हैं कि मोदी प्रधानमंत्री बनने के लायक नहीं हैं। आडवाणी कही बेहतर है। इस तरह के बे-तुके-बयान-बाजी और नौटंकी धरने-प्रदर्शन से बचे और एक-जुट रहे, देश के विकाश में शक्ति-शाली विपक्छ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है
अब तो मेरा  येही कहना है की युपिए को हटाना है तो एक-जुट हो जाओ क्युकी —देर न हो जाये कही देर न हो जाये, बीजेपी को देर न हो जाये कही देर न हो जाये
विशाल श्रेष्ठ
नोट- लेखक के अपने निजी विचार है, कृपया विवाद न खरा करे 
 

हाँ ! मैं बिहारी हूँ ! yes ! i am Bihari!

सुबह 7 .30 मिनट हुए थे दिनांक 14 नवम्बर  और  हमेशा की तरह हाथ जोरे मैं भगवान से प्राथना कर रहा था , पूजा खत्म करने के बाद हमेशा मैं  लोगो के लिए प्राथना /दुवा करता हु।

आज सुबह से  ही श्री बाला साहब ठाकरे की स्वस्थ की खबरे न्यूज़ में थी , मैंने भी उनके लिये  दुवा मांगना चाहा , हाथ जोरे आंखे बंद की और प्राथना करने लगा की तभी मन कहि और चल परा,यकायक बीते दिनों का स्मरण आ गया,और आखे डबडबा गयी,आंशु झर परे, याद आ गयी अगस्त 2003 की मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल में चाय पीते 5 लरके (विध्यार्थी ) जो की परीक्छा देने आये थे (शायद रेलवे की थी)सुबह का समय था .पिंटू जो की मेरे शहर दरभंगा से था और उन सबका अगुवा था ने किसी लोकल लरके से एक एड्रेस (पता ) पूछा , लरके ने जवाब देने के बजाय  उससे पूछा यहाँ क्यू आये ?
पिंटू ने जवाब दिया -भैया परिकछा  देने! उस लोकल लरके ने उनसब्को  डाटा  कहा-भैया होगा तेरा बाप और सालो यहाँ क्या खैराते बटती है,भागो बिहार! बिहारी कही के, और फिर वो चला गया। ये  बचचे जिनकी उम्र 17 से 19 साल रही होगी , वो सब डर गये, उन्हें लगा की वो अपने प्यारे मादरे -वतन हिंदुस्तान  में नही कही दूर दुश्मन देश में है।
खैर जैसे-तैसे हिम्मत करके वो आगे बढे, मंजिल उन्हें पता थी मगर अब वो  घबराये से सहमे -सहमे से किशोर थे ,जो उस घरी को कोश रहे थे जब उन्होंने मायानगरी आने की ठानी।
अभी वो बेचारे सरक पे पैर रखा ही होगा की शिवसेना के राकछस हॉकी स्टिक और लाठी झंडे लेकर बीसियों गुंडे आन परे,उनलोगों ने जिस भी लरके को देखा मरना-पीटना शुरु कर दिया,उन गुंडों में एक वो भी था जिसने पहले ही पिंटू को गलिया दी थी,बाकि बचचों का तो पता नही पर पिंटू आज भी लंगरा के चलता है,और वो मुंबई को हिंदुस्तान का हिस्सा मानने से डरता है।
उस गरीब के माँ-बाप उसका उचित इलाज भी नहीं करा सके , माँ की ममता को कितना गेहरा अघात पंहुचा ये एक माँ ही जान  सकती है ।

अभी मैं इस दुखद घटना की याद से बहार निकला ही था की एक और याद ने मुझको फिर रुला दिया,दिनु एक रिक्शा वाला का बेटा था, वो बेचारा अपनी बीवी और एक बच्चे के साथ मुंबई चल परा, करीब एक साल मुंबई में होटलों में काम करने के बाद उसने एक रेहरी निकली , सब्जी की रेहरी ,उसकी अपनी बिज़नस ,वो बहुत खुश रहने लगा, अपने माँ-बाप को अब पैसे भी भेजने लगा, इस बिच उसके एक और बेटे हुए,भगवान को धन्यवाद् देते हुए उसकी जिंदगी काफी हसी-ख़ुशी बीत रही थी की तभी जुलाई 2010 मनसे के लोगो ने उत्तर-भारतीयों के खिलाफ हिंसक बयान-बाजी शुरू कर दी ,और फिर दादर के पास इक शाम मेरे दिनु (जिसने मुझे गोद में खिलाया था) की लाश मिली ,उस दिन पुरे मुंबई और उसके आसपास करीब सैकरो  लोगो की बेदर्दी से पिटाई हुए,पुलिस ने एक भी हिंसक घटना को नहीं माना हाय! रे कांग्रेस सरकार ! और बेशर्म हैवान शिव-सैनिक और मनसे के गुंडे,

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आह! क्यु नहीं लगेगी उन माँ की जिसने अपना बेटा खोया? क्यू तुझे भगवान माफ़ करे? क्यू तेरे घर में भी मातम का आलम न हो? क्या हम हिन्दुस्तानी नहीं है? क्या ये हमारा देश नहीं है?
रोते हुए मैंने बस इतना बोला  -हे ! भगवन मैं निशब्द हु, दुवा भी नहीं मांग सकता, तुझे जो करना है कर, और ठाकरे साहब आपके लिए मेरे पास कोई दुवा/विनती नहीं है- क्युकी हाँ ! मैं बिहारी हूँ ! और मुझे गर्व है इस बात का ।
जय हिन्द जय बिहार
नोट-नाम काल्पनिक है जिससे कोई विवाद न हो, पर पात्र  और घट्ना काल्पनिक नहीं, समय में कुछ अंतर हो सकता

 किसी की भावना अहित करने की कोई मंशा नहीं,किसी को चोट पहुची हो तो अज्ञानी समझ माफ़ करे,
 विशाल श्रेष्ठ

Burfi for oscers and man mohak ji

Burfi is a traditional Indian dessert that comes in several varieties all with different tastes & textures

now , Barfi and kahani is shortlisted among 11 hindi movie and 6 regional films for category of Best Foreign Language Film at the Oscars this year, for me Barfi and kahani is the best possible choice for this,and finally ‘Barfi’ has been nominated as India’s entry in the category of Best Foreign Language Film at the Oscars awards this year. Yupii!!!                                                                                                                                           The film is a moving tale about a deaf-mute boy nd an autistic girl. The film is directed by Anurag Basu, starring Ranbir Kapoor actress Ileana  D’Cruz  and Priyanka Chopra in the lead roles has a sensible approach towards differently abled people, the film revolves around a happy-go-lucky Barfii played by Ranbir as he goes through love and heartbreak. Actress priyanka chopra play an autistic girl in the film, which also marks the debut  Ileana D’Cruze (Southern star)

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The movie touchs viewers and critics heart, and finally get his best rewards ,now we all waiting for oscer award,

what a coincidence i m trying to write about movie barfi and the inspiration of this movie today, i personally think that Anurag Basu (Director) thought about our great leader shri man mohak ji and he inspired to direct a dumb n deaf movie, and what a great co-incidence again ….. today barfi getting attention from  the Film Federation of India and nominated to oscar ,in the same time our great leader is getting attention from a guy santosh suman ( who protested against the Prime Minister at a conference in Delhi) and nominated for next day news paper head line, smhow i think that is a cheap publicity stunt by that guy, and i criticize  this, i think this men santosh didnt representing common men(he is already punished (1 lakh rs)by high court to launch a case against pm),
ok!! All‘s Well That Ends Well

Go Barfi Go ! for Oscars. The world will love it

note- plz take it lightly. , image taken by times of india

अन्ना तेरा दर्द ना जाने कोइ !! तेरा दर्द ना जाने कोइ !!

अन्ना तेरा दर्द ना जाने कोइ !!                                                                                                                               हफ़्ते भर पेह्ले दो पोस्ट लिखा  था -१-दो हन्सो का जोड़ा बिछड़ गयो रे…..! २-काजल की कोठरि मे कालिख तो लागे हि लागे, दोनो हि पोस्ट मे अन्ना जि और केज्रिवाल जी के अलग होने कि सम्भवना और राजनिति मे केज्रिवाल जि कि मह्तवाकान्छा की चाहत को दर्शाया गया था।

अन्ना जी के अन्तरात्मा की अवाज को केजरिवाल जि मेहसुस नहि कर सके।अन्ना जी के चरित्रा और निस्ठावान समाजसेवा कि भावना को केजरिवाल जि ने महत्वा नहि दिया। कुमार विश्वास जी ने तो हद करदि, अपने    फ़ बि  वाल पे उन्होने आज अन्नाजी को हि झुठा करार दिया, उन्होने कहा- “मुझे लगता है कि ये नव-जागरण देश का है ,किसी भी व्यक्ति-आकृति का नहीं ! जंतर-मंतर से उठते समय अन्ना ने कहा था कि अब किसी राजनैतिक पार्टी से मुझे कोई आशा नहीं है, अतः अब मैं राजनैतिक-विकल्प दूंगा ! अन्ना ने ही अरविन्द और बाकी साथियों से ये कहा था कि फेसबुक,मेल और एस.एम्.एस. के ज़रिये देश से पूछो कि लोग क्या चाहते हैं ! दो बार पूछा भी ! लोगों ने कहा कि आन्दोलन को राजनैतिक विकल्प चाहिए !पर आज अब अन्ना ने आज कहा कि इन दोस्तों को मंच पर भी नहीं चढ़ने दूंगा, फेसबुक और नेट पर मुझे कोई भरोसा नहीं।”

कुमार विश्वास के बाद केजरिवाल जी ने भि कहा-“हमे अन्ना के फ़ैस्ले पे विश्वास नहि हो रहा,हमने तो वहि किया जो अन्ना ने कहा था।”

ये टिम केजरिवाल अन्ना जि को समझ नहि सके! अन्ना जि ने कितने हि बार कहा-“मै राजनिति मे कभि नहि आउंगा। हा! राजतनिति विकल्प जरुर पेश करुंगा।”

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आज कुछ लोग उन्हे नरम और गर्म दल के रुप मे पेश कर रहे है, कुछ लोग अन्नाजि के खिलाफ़ बोल भि रहे है, कुछ लोग केजरिवाल के खिलाफ़ ह्ऐ।

इस बिच मैने अन्ना जि के दर्द को मेह्सुस किया, अन्ना जि इतने मायुस तो सरकार के कदम से भि नहि हुए, उन्होने कहा-“सरकार और कुछ असमाजिक तत्वो ने हमे तोरने कि  कोशीश कि मगर वो नकाम हुए, मगर आज हालत अलग हो गये” उन्का गला रुन्धा हुआ था । अन्ना जि टुट गये, वो टुटे मन से बाबा के बुलावे पे मिल्ने गये ,कल हि बाबा रामदेव और जेनरल वि के सिंह से मुलाकात कि। इस मुलाकात का अञांम किसि को नहि पता|

आपको याद होगा,अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि- यदि अन्ना ने समर्थन नहीं किया तो इंडिया अगेंस्ट करप्शन कभी भी राजनीतिक पार्टी कभी नहीं बनाएगी। अभि कुछ दिन पेहले भि यहि बात दुहरायि थि, मगर सत्ता कि चाहत हि कुछ एसि है कि मोह छुट्टा नहि।

हद है !! कि टीम केजरिवाल का केह्ना है कि उनहोने अन्ना को समुचे भारत का सर्वमन्या नेता बनाया, अब जब उन्हे अन्ना कि जरुरत है तो उन्होने हाथ खड़े कर दिये। मतलब क्या- मतलब इन पाँच कलियुगि पान्ड्व (१-केजरिवाल्,२-पि भुसण्,३-कु विश्वास्,४-सिसौदिया,५-गोपाल राय्) ने कृष्ण को (अन्ना) को हि महाभारत से अलग कर दिया! कि “आप हमे इस महाभारत मे सहयोग करके सत्ता सुख पाने मे मद्त करे या आप वापस जाये रालेगण सिद्धि”।

दोस्तो अन्ना जी ने ३५ साल से जयादा समय से रास्त्र कि सेवा मे है,और इन ३५ सालो मे पेहलि बार उन्हे कोइ छोर के गया, जहा बात है टिम  अन्ना कि तो हेग्रेजी,बेदि जी,  मेघा पाटेकर , रजिन्दर सिहं (जिन्होने पैसो के हेर​-फ़ेरि के डर से टिम छोड़ि थि) ,सुरेश पठारे , शिवेंद्र सिंह चौहान , सुनीता गोधरा, मधुरेश,शिवेंद्र सिंह  और स्वामि अग्निवेस (विवादित सदस्य टिम अन्ना) और श्गुन काज्मि ये सभि छोर गये या निकाल दिये गये वो भि केवल १८ महिने मे। केजरिवाल जि महाभारत कि लड़ायि एसे कैसे जितोगे?

बिना इमानदार और चरित्रावान सहयोगियो के आप अग्ले दस साल तक भि द्स के आकड़ो पे नहि पहुच सकते। अन्ना जी का दिल टुटा है तो अवाज देर तक सुनायि देगि।ये एक सच्चे और देश्-भक्त इनसान का दर्द है, जो आप्को हम्को और पुरे देश को देर तक सुनायि देगि।
सचमुच! आज ये मै मान गया भग्वान इमानदार लोगो कि बार्-बार परिक्छा लेते है, और हमे आशा है कि अन्ना इस परिक्छा मे सफ़ल होंगे।

अन्ना जी आप राले-गण मे हो या दिल्लि आप सदा हमारे दिल मे है, और अन्त मे-” जबे तोमार डाक सुने कोइ ना अशि तबे एकला चलो रे!”

नोट्-यहा लिखित पध पुर्ण्ता मेरि अन्तरात्मा कि अवाज है. किसि को ठेस लगा हो तो खेद है, प्रस्तुत तस्वीरे विभिन्ना फ़ बि वाल से