Independence Day ( A story of Independence by rare pics)

At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom. A moment comes, which comes but rarely in history, when we step out from the old to the new, when an age ends, and when the soul of a nation, long suppressed, finds utterance.

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this is how we fly our Tiranga (national flag) 15 Aug 1947

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Gandhiji, subhash ji patelji and rajendraji)   Circa 1940: Indian nationalist leader, Subhas Chandra Bose (1897 – 1945). (Photo by Keystone/Getty Images)

Image the Hindustan tmes 15 aug 1947

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Bose advocated complete independence for India at the earliest, whereas the All-India Congress Committee wanted it in phases, through Dominion status. Finally at the historic Lahore Congress convention, the Congress adopted Purna Swaraj (complete independence) as its motto. (1944)

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Nehru ji and Mountbatten at India Gate 16 Aug 1947

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Jinnha and gandhi

jinnha was the first person who said- “i m Indian first and Indian last”, and also the first person (ten year latter) who said- two nation theory,

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Members of the Indian National Congress (foreground left to right) Mahatma Gandhi (Mohandas Karamchand Gandhi, 1869 – 1948), Subhas Chandra Bose (1897 – 1945) and Vallabhai Patel (1875-1950) during the 51st Indian National Congress. (Photo by Keystone/Getty Images)

ImageBose was imprisoned twice in 1921 and 1924. He was elected president of the Congress in 1938 defeating Mahatma Gandhi’s candidate Patabhi Sitaramavya in 1938. He resigned from Congress and formed the Forward Block. 

Image Subhash ji meet Hitlor at berlin in may 1942

Image Bhagat Singh n dsp gopal singh at lakhpat jail lahore

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death certificate of our pride 

Image shri pinglani venkaya- who made our Tiranga

Image India gate at 1947

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guruji at 1942

ImageNathuram say pranam Gandhiji and then he killed him 30 jan 48 (pics may be fake)

and last one-

Image Gandhi ji and my father were not tainted -anita bose (daughter of great subhash) (pic is nt original)

jai Hind

note- all pics may be subject of copyright

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गाँधी बनाम मुर्ख वर्ग (Gandhi vs fool )

गाँधी बनाम मुर्ख
आजकल एक नया युवा वर्ग सामने आ रहा है (संख्या में कम है मगर परेशानी क सबब भी है)
ये दो-चार मूर्खो की किताब और नेट पे लिखी कुछ बकवास पढ़ कर खुद को महाज्ञानी समझ बैठते है।
ये गांधीजी को पसंद नहीं करते, कोई बात नहीं आपका अधिकार है आप जिसे चाहे न-पसंद करे , मगर इनके कुछ तर्क सुनकर हँसी आ जाती है और युवा वर्ग की सोच पे दया भी आ जाती है,
कुछ तर्के इस प्रकार है-
१-सुभाष चन्द्र बोश ने कांग्रेस गांधीजी के कारन छोरा – जवाब – सुभाष जी खुद गाँधी जी का आदर करते थे और नरम दल और गरम दल में से उन्होंने बाद में गरम दल चुना ।
२- भगत सिंह मेंरे आदर्श है और गाँधी भगत के खिलाफ थे,- जवाब- भगत जी ने खुद गांधीजी के प्रयासों के कायल थे और सभी उस समय के कांग्रेसी नेताओ के समर्थक थे, मगर वो पूर्णता अहिंसावादी नही थे और उन्होंने अपना अलग राह चुनी और अमर हो गये।

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३-सुभास जी को गाँधी जी ने कांग्रेस प्रमुख पद से हरवाया- जवाब – गांधीजी अहिंसा के समर्थक थे और कुछ समय बाद सुभास जी गांधीवादी धारा से कांग्रेस को अलग करना चाहते थे, मगर सुभास जी ने खुद को पाया की वो यहाँ रह-कर देश को आजाद नहीं कर पाएंगे और सभी जानते है वो गरम दल/धारा के पक्छधर थे,वे खुद ही कांग्रेस छोर चले न की उन्हें किसी ने बाहर का रास्ता दिखलाया ।

४- हिंदुस्तान से  मुसलमानों को उन्होंने नहीं जाने दिया, जवाब-कोई भी कांग्रेस नेता या और देश-भक्त नही चाहता था की देश के और टुकरे हो , अगर आपको थोरा सा भी ज्ञान हो तो पता होता की पाकिस्तान धर्म के नाम पर भारत में दंगे करवाके देश के कई टुकरे  करना चाहता था, क्या आप चाहते थे की भारत के और टुकरे हो, वैसे भी भारत कभी धरम के नाम पर बटवारे का समर्थक नहीं रहा। 

५-कांग्रेस गांधीजी के नाम पर वोट पाती  है – जवाब- इसमें गांधीजी की क्या गलती , अरे गांधीजी तो खुद कांग्रेस को भंग करना चाहती थे, आपको आपत्ति है तो कांग्रेस की आलोचना करे, गांधीजी की आलोचना क्यों?

६ – कुछ आपत्तिजनक जनक टिपण्णीया भी है जो सामाजिक स्तर पे मैं नहीं लिख सकता, संस्कार आदेश नहीं देते 

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अब मैं उन लोगो के नाम लिखना पसंद करूँगा जिन्होंने गाँधी के आदर्शो को अपनाया है या उनकी तारीफ में सर झुकाया है , 

अन्ना हजारे-गांधीजी युग-पुरष , उनके आदर्शो पे ही मैं चलता हु। ,
अब  सबसे पहले नाम मैं लूँगा पूर्व प्रधान मंत्री का
१-अटल बिहारी वाजपेयी, इन्होने तमाम जीवन गाँधी विचारधारा को अपनाये रखा ।
२- अलबर्ट आइन्स्टीन – इन्होने ओ यहाँ तक कहा की – आने वाले समय में युवा भरोषा नहीं करेंगे की गाँधी नाम का कोई हार-मांस का कोई मानव इस धरती पे थे।
३-बाबा राम देव – गाँधी हमारे आदर्श।
४-मदर टरेसा – कई बार गाधीजी के सन्देश को दुनिया भर में फैलाया ।
५ – रविद्रनाथ टगोर-इन्होने ही तो महात्मा नाम दिया था ।
६-हो-चिन्ह-मिन्ह- कोई भी क्रांति बिना गाँधी के विचार धारा को साथ लिए बिना नहीं हो सकता ।
७-नेल्सन मंडेला-गाँधी ने ही सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखलाया और मैंने जित हासिल की ।
८- बराक ओबामा-गाँधी जीवन से मैंने काफी कुछ सिखा, उनके मार्ग पे चलके ही मैं यहाँ तक पंहुचा ।
९-दलाई लामा-गाँधी के लिए मन में बहुत श्रधा है, मुझे लगता है की वो एक ऐसे महँ इन्सान थे जिन्होंने बुध के सिधान्तो को अपनाया ।
१० – मर्थिन लूथर किंग जूनियर – इसा के सन्देश को गाँधी ने अपनाया, वो एक महा-मानव थे ।
११-नरेन्द्र मोदी – गाँधी जी हमारे गुजरात और देश के गौरव , गुजरात उनके आदर्शो पे ही चल रहा है ।
१२ – जी पि कोइराला-गाँधी विस्व के नेता ।
अन्य बहुत सारे व्यक्ति/नेता है जो गाँधी के अनुयायी है या उनका काफी सम्मान करते है।

आप गांधीजी को पसंद नही कर सकते मगर उनको न-पसंद भी नहीं कर सकते –

विशाल श्रेष्ठ