Surgical Strike

Finally after a long time Indians shown their power. the hole world knows that Pakistan is country which always support terrorism. Pakistan is also victims of many terrorist attack.
In India, when the Modi government came in power we the people’s are waiting for an action against Pakistan,because they promise so many time that they are going to teach some lesson to pakistan.

Nearly 10 days after the Uri attack that claimed 18 jawans, India carried out surgical strikes in Pakistan Occupied Kashmir, inflicting heavy casualties on terrorists and ‘those protecting them” and indicating a change of stand on the rules of engagement on the disputed line of control.

Indian DGMO Lt Gen Ranbir Singh announced that Pakistan had been informed about the strikes and that India has no intention of continuing the operation. after this Pakistan arrange a cabinet meeting after this so called Surgical Strike and give a statement that this is totally fake. Isn”t it ?

in
Here I am going to describe you how Indians finished his excellent operation 9according to many news agency)  

1. Operation begins around 12.30 am on Wednesday. According to reports, paratroopers from Special Forces were involved.

2. The commandos were airdropped at the LoC, from where they crossed over to the Pakistani side.

3. According to sources, Indian commandos entered three Km across the Line of Control to conduct the ‘surgical strikes’

4. The strikes were carried out in Bhimber, Hotspring, Kel & Lipa sectors, on Pak’s side of LoC, according to reports.

5. The location was 500 meters-2 Km across LoC, sources said

6. 7 terror launch pads were destroyed during the surgical strike

7. 38 terrorists and 2 Pakistani soldiers were killed in Indian Army surgical strikes, no Indian casualties. Those killed included terrorists, their guides and handlers

8. Helicopters were used.

we hope that in coming days we live our life in peace but Pakistan may have different plan
let see!

 

 

Shresth Vishal

ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होई – love is god – love is all-around

प्रेम-प्यार-इशक़-माया-अनुराग-प्रीत और न जानें कितने नाम है इस पवित्र रिस्ते के , न जानें कितने तरह के भाव है
न तो कोई सीमा है न कोई बंधन है , ये तो बस उरना जनता है प्यार बाटना जानता है !
पोथी-पोथी पढ़ जग मुआ , पंडित भया न कोई
ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होई !!
कबीरदास ने क्या सही कहा था , मैं तो नत मस्तक हु उनके इस विचार पे , इस सन्देस पे !
प्रकृति ने या उस नीले छतरी वाले ने कोई बंदिसे बन्दों पे नही लगायी ये तो हम है जिन्होंने मानव को मानव से बाटा,
पहले धर्म के नाम पर, फिर जात के नाम पर फिर रास्ट्रीयता के नाम पर, रंग-भेद के नाम पर फिर बाटा आमिर-गरीब के नाम पर
, बस बाटते रहे – बस बाटते रहे, और जिन्होंने भी जोरने का प्यार का धागा पिरोने का कम किया उन्हें पागल घोषित कर दिया !
खैर यहाँ मैं अपने पे आता हुँ !
मैं काफी खुस था अपने प्यार में , बरा भरोसा था, साथ जीने-मरने कि कस्मे भी दोहराता था
मगर आज से ११ साल पहले सिर्फ इसलिए मुझे छोर दिया गया ( शायद ) क्युकी मेरा सरनेम श्रेस्ठ था
और उनका कुछ और ……….
न उम्र कि सीमा हो न जन्म का हो बंधन – जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन …………………………………………

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और हम आज भी उनके है
विशाल श्रेस्ठ

आजाद मुल्क में सेक्स गुलामों का गांव! (बेडिय़ा समुदाय) malaha gao, bharatpur

आजाद मुल्क में सेक्स गुलामों का गांव!

कैमरा देखते ही दो बहनें चौकन्‍नी हो उठीं जबकि तीसरी चादर में छुप गई
बैठेगा क्या? भरतपुर के बाहर जयपुर हाइवे पर दो किलोमीटर के एक हिस्से में ये दो शब्द साफ सुने जा सकते हैं. इसका सीधा-सा अर्थ ‘सेक्स के लिए बुलावा’ है. इशारा करती आंखें और अर्थपूर्ण अंदाज में हिलते हुए सिर वहां से गुजर रहे पुरुषों को सीधे-सीधे न्यौता देती हैं.तीस साल की मंजु ठाकुर इस कमाऊ पेशे का बचाव करते हुए कहती हैं, ”सेक्स हमारा खानदानी धंधा है. ” छोटे कद की लेकिन खासे दमखम वाली मंजु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में पाई जाने वाली बेडिय़ा नाम की एक जाति से ताल्लुक रखती है. इस तबके में लड़कियां अकसर किशोरावस्था में ही समाज की सहमति से वेश्यावृत्ति के धंधे में उतार दी जाती हैं.

भरतपुर के मलाहा गांव के पास कचरे से अटी सड़क के किनारे अपना धंधा चलाने वाली मंजु खासी अनुभवी हो चली हैं. उन्हें यही एक धंधा आता है. वे बताती हैं, ”मैं उस वक्त 10 या 11 साल की थी, जब मेरे बाप ने मुझे धौलपुर के एक बहुत बड़े कारोबारी के यहां भेजा था. ” जीवन के उस पहले सहवास की एवज में परिवार को 10,000 रु. मिलने की बात को वे याद करती दिखती हैं.

”बीसेक साल पहले यहां किसी लड़की को कौमार्य भंग की एवज में मिलने वाली यह सबसे ज्यादा रकम थी. ” वे फख्र के साथ यह भी बताती हैं कि आज भी किस तरह ”जयपुर के धनी-मानी कस्टमर” उसे खोजते हुए आते हैं.

पंछी का नगला नाम से पहचाने जाने वाले मलाहा गांव में आज 100 से ज्यादा बेडिय़ा स्त्रियां देह व्यापार के धंधे में हैं. कपड़ों से झांकते अंग, चेहरे पर पाउडर की परतें, गहरे लाल या बैंगनी रंग की लिपिस्टक लगाए इन महिलाओं की बेचैन निगाहें आते-जाते लोगों में अपने ग्राहक की तलाश करती दिखती हैं.

2005 में यहां बने फ्लाइओवर से बेडिय़ाओं की बस्ती दोफाड़ हो जाने के बावजूद उनके पुश्तैनी धंधे पर कोई असर नहीं पड़ा. शायद यह राजस्थान में एकमात्र ऐसी जगह होगी जहां गाड़ी वाले फ्लाइओवर का इस्तेमाल करने की बजाए नीचे वाली ऊबडख़ाबड़ सड़क से जाना पसंद करते हैं— ‘दिलकश नजारा’ देखने के लिए.

एक दूसरे संभावित ग्राहक की आस में, गहरी लिपिस्टक लगाती मंजु कहती हैं, ”धंधा चोखा है. ” मंजु, उसकी बहनें 25 वर्षीया निशा, 24 वर्षीया रेशमा और उनकी 20 वर्षीया बुआ चांदनी मिलकर 40 लोगों का परिवार चलाती हैं. इस परिवार में उनके पांच भाई, उनकी बीवियां, बच्चे और इस धंधे से पैदा इनकी खुद की एक संतान शामिल है. मंजु की 50 वर्षीया मां सरोज कहती हैं, ”बहुत कोशिश की कि ये शादी कर लें मगर इन लड़कियों ने इस ओर कान तक न दिया. ”

इस गांव के मर्द यहां की औरतों को जबरन इस पेशे में धकेले जाने के आरोप को सिरे से खारिज करते हैं. छह बहनों और दो बुआओं की कमाई पर पल रहे 37 साल के विजेंद्र साफ-साफ कहते हैं, ”जबर्दस्ती का नहीं, राजी का सौदा है ये. ” थुलथुले बदन के विजेंद्र का दावा है कि उनकी हर बहन से पहले पूछा गया था: ”धंधा करोगी या शादी?”

मंजु और निशा के 39 वर्षीय भाई लाखन भी इसमें हामी भरते हैं. एक चमचमाती मोटरसाइकिल और स्कार्पियो के मालिक लाखन कहते हैं, ”सरकार मुझे कोई ठीकठाक नौकरी दे दे तो मैं बहनों को देह व्यापार में जाने से रोक लूंगा. ” उन्हीं के पीछे खड़ी दोनों बहनों के रंगे-पुते होठों पर व्यंग्य भरी मुस्कराहट दौड़ जाती है.

निशा मर्दों वाली एक कहावत दोहराती हैं ‘शादी तो बर्बादी है’. बेडिय़ा मर्दों की बीवियां अमूमन इस पुश्तैनी धंधे में हिस्सा नहीं लेतीं. वे खाना पकाने, सफाई और अपनी कमाऊ ‘ननदों’ के बच्चों की देखभाल जैसे घरेलू कामों में वक्त बिताती हैं. निशा रूखे स्वर में बोलती हैं,”गृहस्थी का काम खच्चर का.”

” निशा ने अपनी ‘कामकाजी’ बुआओं की कमाने और खर्चने की आजादी और घर के कामों में खटती मां को देखा है. थोड़ा हिचकते हुए वह बताती है कि वह 14 साल की उम्र में पूरी तरह से इस धंधे में उतर गई थी. 10 साल बाद अब वह एक दिन में 1,200 रु. से 2,000 रु. तक कमा लेती है.

यानी रोज की सरकारी दिहाड़ी 149 रु. से दस से बीस गुना ज्यादा. एक दिन में उसे 6 से 10 पुरुषों के साथ सेक्स करना होता है. उसके मुताबिक, त्यौहारों के आसपास या फिर मजदूरों को तनख्वाह की तारीखों के आसपास यह कमाई दोगुनी तक हो जाती है.

यहां लड़कियों के लिए इस ‘व्यापार के गुर’ सीखने में वक्त नहीं लगता. बचपन से वे देखती आ रही हैं कि सड़क किनारे चादर बांध उसके पीछे 10 मिनट में सेक्स करके बुआएं कपड़े दुरुस्त कर बाहर आ जाती हैं. मंजु बताती हैं, ”एक दफा एक ग्राहक जब टेढ़ेपन से पेश आने लगा तो उसने भाई को आवाज लगा दी. यही मेरा असली सबक था, बाकी तो देखा-सुना था.”

लेकिन हर बेडिय़ा यौनकर्मी मंजु जितनी किस्मत वाली नहीं होती. मंजु और निशा के घर से बमुश्किल 50 फुट दूर एक झोंपड़ी में रह रही 30 वर्षीया काली (बदला हुआ नाम) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं लेतीं. दो साल पहले एचआइवी ग्रस्त होने की बात पता चलने के बावजूद वह धंधा कर रही है.

काली कहती है, ”मुझे और कोई काम ही नहीं आता. भाई अभी इतने छोटे हैं कि कमाने नहीं जा सकते. ” वह तुरंत जोड़ती है कि अब वह बिना कंडोम सेक्स नहीं करती.

बैंकॉक स्थित संगठन ग्लोबल एलांयस अगेंस्ट ट्रैफिकिंग इन वूमैन की संस्थापक सदस्य 57 वर्षीय ज्योति संघेरा कहती हैं, ”गरीब महिलाओं के काम और उनके चयन के संबंध को समझना जरा टेढ़ी खीर है. वास्तव में हाशिये पर जी रही एक महिला के लिए ‘बलात’ और ‘स्वैच्छिक’ यौन कर्म में अंतर करना बेमानी होता है. ”

पक्षी विहार के लिए मशहूर भरतपुर जिले में दूसरी बार कलेक्टर बनकर आए 34 वर्षीय नीरज कुमार पवन इन बेडिय़ा परिवारों के लिए रॉबिनहुड बनकर उभरे हैं. उनका मानना है कि सदियों पुरानी परंपरा को पुलिस डंडे के जोर पर खत्म नहीं करा सकती.

आठेक साल पहले जिला प्रशासन ने बेडिय़ा बस्ती में आग लगवाकर उन्हें वहां से खदेडऩे की कोशिश की थी. एक कुप्रथा को खत्म करने की यह अमानवीय कोशिश थी. अब वहां स्कूल खोलने की इजाजत ले आए हैं. हालांकि पक्षीविहार का इलाका होने की वजह से यहां स्कूल जैसे पक्के निर्माण पर आपत्तियां उठाई गईं.

खैर, यौनकर्मी 35 वर्षीया रिया को अब लगता है कि उनकी ”बेटी की जिंदगी अलग होगी. ” 11 साल की इकलौती बेटी अर्चना को रोज स्कूल भेजना अब उनकी दिनचर्या में शामिल है. रिया के लिए ‘धंधा’ छोडऩा आसान नहीं पर वह कहती है कि ”मेरी बिटिया वही करेगी जो वह चाहेगी. ”

भरतपुर कलेक्टर की लगातार कोशिशों का नतीजा है कि मलाहा और पास के बगदारी गांव—जहां कुछ बेडिय़ा परिवार 2005 में हाइवे बनने पर चले गए थे—में बदलाव की सुगबुगाहट है. पवन का दावा है कि ”18 साल से कम उम्र की कोई लड़की यौनकर्म में शामिल नहीं. उधर अफवाह है कि दो किशोरियों के कौमार्य की कीमत डेढ़ से दो लाख रु. लग रही है. एक बेडिय़ा लड़की के विवाह करने पर इसकी आधी रकम मिलती है.

30 वर्षीया मंजु 20 साल से देह व्यापार में है

बगदारी के बाहर करीब 15 बीघे में फैली झुग्गियों में रह रहे बेडिय़ाओं के लिए जिंदगी सचमुच बेहद दुश्वार है. वे बिजली-पानी के बगैर जीने को विवश हैं. गांव के स्कूल में उनके बच्चों को अलग कर दिया जाता है. ऊंची जाति के सरपंच की उन्हें वोटर या आधार कार्ड मुहैया कराने में कोई दिलचस्पी नहीं. बस्ती के शुरू में ही लोहे की दुकान चलाकर गुजर-बसर करने वाले 29 वर्षीय रवि कुमार कहते हैं, ”अपने ही वतन में हमें पराया बनाकर छोड़ दिया गया है. ”

कुमार और उनकी 60 वर्षीय मां लीलावती इस बात की ताकीद करते हैं कि जब तक उनकी बिरादारी की खूबसूरत लड़कियों को सेक्स से बढिय़ा आमदनी हो रही है, तभी तक यह गाड़ी चलेगी. रवि को गहरी शिकायत भी है, ”गांव के (ऊंची जाति के) लोग जान-बूझकर हमारे बच्चों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करते हैं और हमारी ही बिरादरी की लड़कियों के साथ सोने के लिए लाइन लगाते हैं. गांव का आदमी होने की बात कहकर पूरे पैसे भी नहीं देते.

महाला गांव के फ्लाइओवर के नीचे से जा रहे 20 फुट लंबे अंडरपास की कंक्रीट की दीवार पर लिखा है, ”प्यार का अनमोल तोहफा—फ्रीडम 5. पांच साल तक प्रेग्नेंसी से टेंशन फ्री. ” बेडिय़ा औरतें इस पर हंसते हुए कहती हैं, ”बच्चे तो अच्छे होते हैं. लड़कियां होगीं तो ज्यादा कमाएंगी और लड़के उनकी हिफाजत करने के काम आएंगे. ”

असित जॉली | सौजन्‍य: इंडिया टुडे | भरतपुर, 23 अक्टूबर 2013 | अपडेटेड: 12:39 IST

note– all right reserve to aajtak only राजस्थान का यह वो गांव है जहां सेक्स खानदानी धंधा है…
http://aajtak.intoday.in/story/sex-as-trade-and-tradition-1-745295.html

शिक्षक दिवस कि सार्थक्ता (5 september Teacher’s Day)

Happy teacher’s day dear friends, this is my old post , i am reblogging this, kindly like and share your views

vishal shresth

गुरु रे ब्रम्हा गरु रे विषनू  गुरु रे देवो महेषवर​:

गुरु रे सांछात पब्रम्हा तस्मेः श्रि गुरुबे नम​:

अर्थ्::

गुरु हि ब्रह्मा है, गुरु हि विश्नु है, गुरु हि देव महेश है ,

गुरु हि सक्छात परमेश्वेर है, एसे गुरु को मेरा सत सत नमन ॥

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शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ अपना पोस्त्\गद्य कि शृरुवात करना पसन्द करुंगा,

हमारे भारत मे  गुरू होते थे और शिष्य ! दोनो मे अघाद्य प्रेम कि परम्परा रहि है, अपना यह देश परम्परओं का देश है और परम्परा एक धारा होती है , नदि कि अविरल धारा, जो निरन्तर अविकल बहती है नदि कि अविरल धारा समय के सथ-साथ अब बदल गयी है,

अब ये परम्परा  गुरु-परम्परा   खत्म होति प्रतित हो रहि है, गुरू और शिष्य ! दोनो मे अघाद्य प्रेम कि परम्परा और निस्वार्थ शिछा देने कि भावना खत्म होति प्रतित हो रहि है, अब  गुरु तो रहे नही शिछक मिल्ते…

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गाँधी बनाम मुर्ख वर्ग (Gandhi vs fool )

गाँधी बनाम मुर्ख
आजकल एक नया युवा वर्ग सामने आ रहा है (संख्या में कम है मगर परेशानी क सबब भी है)
ये दो-चार मूर्खो की किताब और नेट पे लिखी कुछ बकवास पढ़ कर खुद को महाज्ञानी समझ बैठते है।
ये गांधीजी को पसंद नहीं करते, कोई बात नहीं आपका अधिकार है आप जिसे चाहे न-पसंद करे , मगर इनके कुछ तर्क सुनकर हँसी आ जाती है और युवा वर्ग की सोच पे दया भी आ जाती है,
कुछ तर्के इस प्रकार है-
१-सुभाष चन्द्र बोश ने कांग्रेस गांधीजी के कारन छोरा – जवाब – सुभाष जी खुद गाँधी जी का आदर करते थे और नरम दल और गरम दल में से उन्होंने बाद में गरम दल चुना ।
२- भगत सिंह मेंरे आदर्श है और गाँधी भगत के खिलाफ थे,- जवाब- भगत जी ने खुद गांधीजी के प्रयासों के कायल थे और सभी उस समय के कांग्रेसी नेताओ के समर्थक थे, मगर वो पूर्णता अहिंसावादी नही थे और उन्होंने अपना अलग राह चुनी और अमर हो गये।

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३-सुभास जी को गाँधी जी ने कांग्रेस प्रमुख पद से हरवाया- जवाब – गांधीजी अहिंसा के समर्थक थे और कुछ समय बाद सुभास जी गांधीवादी धारा से कांग्रेस को अलग करना चाहते थे, मगर सुभास जी ने खुद को पाया की वो यहाँ रह-कर देश को आजाद नहीं कर पाएंगे और सभी जानते है वो गरम दल/धारा के पक्छधर थे,वे खुद ही कांग्रेस छोर चले न की उन्हें किसी ने बाहर का रास्ता दिखलाया ।

४- हिंदुस्तान से  मुसलमानों को उन्होंने नहीं जाने दिया, जवाब-कोई भी कांग्रेस नेता या और देश-भक्त नही चाहता था की देश के और टुकरे हो , अगर आपको थोरा सा भी ज्ञान हो तो पता होता की पाकिस्तान धर्म के नाम पर भारत में दंगे करवाके देश के कई टुकरे  करना चाहता था, क्या आप चाहते थे की भारत के और टुकरे हो, वैसे भी भारत कभी धरम के नाम पर बटवारे का समर्थक नहीं रहा। 

५-कांग्रेस गांधीजी के नाम पर वोट पाती  है – जवाब- इसमें गांधीजी की क्या गलती , अरे गांधीजी तो खुद कांग्रेस को भंग करना चाहती थे, आपको आपत्ति है तो कांग्रेस की आलोचना करे, गांधीजी की आलोचना क्यों?

६ – कुछ आपत्तिजनक जनक टिपण्णीया भी है जो सामाजिक स्तर पे मैं नहीं लिख सकता, संस्कार आदेश नहीं देते 

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अब मैं उन लोगो के नाम लिखना पसंद करूँगा जिन्होंने गाँधी के आदर्शो को अपनाया है या उनकी तारीफ में सर झुकाया है , 

अन्ना हजारे-गांधीजी युग-पुरष , उनके आदर्शो पे ही मैं चलता हु। ,
अब  सबसे पहले नाम मैं लूँगा पूर्व प्रधान मंत्री का
१-अटल बिहारी वाजपेयी, इन्होने तमाम जीवन गाँधी विचारधारा को अपनाये रखा ।
२- अलबर्ट आइन्स्टीन – इन्होने ओ यहाँ तक कहा की – आने वाले समय में युवा भरोषा नहीं करेंगे की गाँधी नाम का कोई हार-मांस का कोई मानव इस धरती पे थे।
३-बाबा राम देव – गाँधी हमारे आदर्श।
४-मदर टरेसा – कई बार गाधीजी के सन्देश को दुनिया भर में फैलाया ।
५ – रविद्रनाथ टगोर-इन्होने ही तो महात्मा नाम दिया था ।
६-हो-चिन्ह-मिन्ह- कोई भी क्रांति बिना गाँधी के विचार धारा को साथ लिए बिना नहीं हो सकता ।
७-नेल्सन मंडेला-गाँधी ने ही सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखलाया और मैंने जित हासिल की ।
८- बराक ओबामा-गाँधी जीवन से मैंने काफी कुछ सिखा, उनके मार्ग पे चलके ही मैं यहाँ तक पंहुचा ।
९-दलाई लामा-गाँधी के लिए मन में बहुत श्रधा है, मुझे लगता है की वो एक ऐसे महँ इन्सान थे जिन्होंने बुध के सिधान्तो को अपनाया ।
१० – मर्थिन लूथर किंग जूनियर – इसा के सन्देश को गाँधी ने अपनाया, वो एक महा-मानव थे ।
११-नरेन्द्र मोदी – गाँधी जी हमारे गुजरात और देश के गौरव , गुजरात उनके आदर्शो पे ही चल रहा है ।
१२ – जी पि कोइराला-गाँधी विस्व के नेता ।
अन्य बहुत सारे व्यक्ति/नेता है जो गाँधी के अनुयायी है या उनका काफी सम्मान करते है।

आप गांधीजी को पसंद नही कर सकते मगर उनको न-पसंद भी नहीं कर सकते –

विशाल श्रेष्ठ

Gandhi is not only a name

Gandhi is not only a name, its a era,

“Generations to come, it may well be, will scarce believe that such a man as this one ever in flesh and blood walked upon this Earth.” ——- Albert Einstein

now these day some educated people belongs to a political party is starting abused against Gandhiji, because some leader said them Gandhiji is leader of congress only. I m strongly disagree with them, my question is why there favorite leader is using Gandhiji name and why they have  snap(picture/statute) of Gandhiji in there office and home?

now read some great people view about the Great Gandhi

“Gandhi was probably the first person in history to lift the love ethic of Jesus above mere interaction between individuals to a powerful and effective social force on a large scale. The intellectual and moral satisfaction that I failed to gain from the utilitarianism of Bentham and Mill, the revolutionary methods of Marx and Lenin, the social contract theory of Hobbes, the ‘back to nature’ optimism of Rousseau, and the superman philosophy of Nietzsche, I found in the non-violent resistance philosophy of Gandhi.”

“If humanity is to progress, Gandhi is inescapable. He lived, thought, and acted, inspired by the vision of humanity evolving toward a world of peace and harmony. We may ignore him at our own risk.”

“Gandhi resisted evil with as much vigor and power as the violent resister, but he resisted with love instead of hate. True pacifism is not unrealistic submission to evil power. It is rather a courageous confrontation of evil by the power of love.”– Martin Luther king jr.

“Gandhiji is my idol” ——Atal Bihari Vajpeyi”

“Then rose the star of Gandhi. He showed that a doctrine of non-violence was possible.”–Arnold Zweig

“I believe that Gandhi’s views were the most enlightened of all the political men in our time.
We should strive to do things in his spirit: not to use violence in fighting for our cause, but by non-participation in anything you believe is evil.” –Einstein 

“I and others may be revolutionaries but we are disciples of Mahatma Gandhi, directly or indirectly, nothing more nothing less.”– ho china minh

“Mahatma Gandhi came and stood at the door of India’s destitute millions, clad as one of themselves, speaking to them in their own language…who else has so unreservedly accepted the vast masses of the Indian people as his flesh and blood…Truth awakened Truth.”– Rabindra Nath Tagore

“Gandhi is not only for India a hero of national history, whose legendary memory will be enshrined in the millennial epoch. -Gandhi has renewed, for all the peoples of the West, the message of their Christ, forgotten or betrayed.”– Romain Rolland

  “Many of his principles have universal application and eternal validity, and I hope the passing years will show that his faith in the efficacy of non-violent pressure as an agent for peaceful change is as justified today all over the world as it was in his time in India.”– U Thant 

“I have the greatest admiration and respect for Mahatma Gandhi. He was a great human being with a deep understanding of human nature. He made every effort to encourage the full development of the positive aspects of the human potential and to reduce or restrain the negative. His life has inspired me ever since I was a small boy.- Dalai Lama

“Not since Buddha has India so revered any man. Not since St. Francis of Assissi has any life known to history been so marked by gentleness, disinterestedness, simplicity of soul and forgiveness of enemies. We have the astonishing phenomenon of a revolution led by a saint.”–Will Durant

“Gandhi is my role model “— nelson Mandela

“one man who changed the world by his teachings”.–US Vice President Joe Biden

“Gandhi called the world’s religions beautifulflowers from the same garden,” Jon carry

“gandhiji is the leader of hole world”-g p koirala

“we are proud that Gandhi born here”- modi

“Gandhiji is our pride”-baba ramdev

Now few words from gandhiji —

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Always aim at complete harmony of thought and word and deed. Always aim at purifying your thoughts and everything will be well.

Mahatma Gandhi

Hate the sin, love the sinner.

Gandhi signature.svg

“I m citizen of the world”——————–Gandhi

ये झारू जरुर चलेगी ! (आम आदमी पार्टी) Aap

ये झारू जरुर चलेगी !,, बहुत दिनों से आम इन्सान इस इंतजार  में थे की राजनीती से ये गंदगी कैसे साफ होगी? कौन करेगा?क्यों करेगा?

चलो फिर आदरनीय अन्ना हजारे के चेलो ने समाज से ये गंदगी साफ करने की बिरा उठाया, मैं खुद इस राजनेतिक दल बनाने के निर्णय से नाखुश रहा और आगे भी खुल कर समर्थन में सायद ही आ सकू।
आम आदमी का नाम ले कर एक राजनेतिक दल बना आम आदमी पार्टी, लाखो लोगो ने हाथो हाथ लिया,और इनके समर्थको की संख्या बढती चली,
शायद  कल को केजरीवाल ये शेर भी सुनाये-” मैं अकेला ही चला था जानिबे मंज़िल मगर, लोग  साथ आते गये और कारवाँ बनता गया, दहर में ‘मजरूह’ कोई जाविदां मज़मूं कहां , मैं जिसे छूता गया वो जाविदां बनता गया”
अब  जब बात राजनीती से गंदगी साफ करने की हो तो चिन्ह (चुनाव-चिन्ह) भी कुछ ऐसा ही चाहिए, तो लो जी चुनाव आयोग ने भी काफी सोच समझ कर राजनीती से गंदगी साफ करने के लिए एक चिन्ह दिया जो आम-आदमी काफी आराम से इस्तमाल करते है अपने घर की गंदगी साफ करने के लिए, तो अब राजनीती की गंदगी साफ करने के लिए भी येही चिन्ह मिला- झारू!
जी हा ये झारू जरुर चलेगी अब काफी सारे राजनेतिक दलों के समर्थक इसका मजाक उरायेंगे , अरे उनका काम है ये अपने संस्कार तो वो दिखायेंगे ही,
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आप लोग और आप के लोग मुझे अरविन्द समर्थक समझने की भूल न करे वरना भविष्य में दर्द होगा, मैं तो बस दिल की सुनता हु, क्या करू अन्ना जी का चेला हु न|
इधर कुछ दुविधा भी है, राजनेतिक गंदगी को दूर करने के चक्कर में ये कही खुद भी इस गंदगी का हिस्सा न बन जाये,मगर इस डर से एक इमानदार पहल से दूर नही भाग सकते, बहरहाल जो भी हो ये झारू जरुर चलेगी अब गंदगी साफ करने में चले या आम इन्सान की मासूम सोंच पे |
आपका विशाल श्रेष्ठ
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